46 साल बाद कोटा में निर्यापक मुनि योगसागर जी महाराज का ऐतिहासिक चातुर्मास
कोटा में 46 वर्षों बाद निर्यापक मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज का ऐतिहासिक चातुर्मास होने जा रहा है। 19 जुलाई को भव्य मंगल प्रवेश जुलूस के साथ वर्षायोग का शुभारंभ होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे।

तस्वीर में (बाएं से दाएं) मंदिर समिति के पदाधिकारी एक प्रेस वार्ता के दौरान जानकारी देते हुए।
शिक्षा नगरी कोटा में इस वर्ष जैन समाज के लिए एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक अवसर आने जा रहा है। लगभग 46 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य, लघु भ्राता और तप, त्याग एवं उत्कृष्ट साधना के प्रतीक निर्यापक मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज का पावन चातुर्मास (वर्षायोग) श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र नसियां जी, दादाबाड़ी में संपन्न होगा।
इस आयोजन को लेकर संपूर्ण हाड़ौती सहित देशभर के जैन समाज में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण है। कोटा के आध्यात्मिक इतिहास में इसे महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
19 जुलाई को निकलेगा भव्य मंगल प्रवेश जुलूस
नसियां जी मंदिर के निदेशक हुकम जैन 'काका' ने बताया कि मुनिश्री के मंगल आगमन को लेकर तैयारियां तेजी से चल रही हैं। 19 जुलाई (रविवार) को प्रातः 8 बजे सीएडी सर्किल से भव्य मंगल प्रवेश जुलूस प्रारंभ होगा। यह जुलूस एस.एस. डेयरी, छोटा चौराहा दादाबाड़ी एवं महावीर कॉम्प्लेक्स होते हुए नसियां जी मंदिर पहुंचेगा।
जुलूस मार्ग पर 51 भव्य स्वागत द्वार बनाए जाएंगे, जहां श्रद्धालु पुष्पवर्षा और जयघोष के साथ संतश्री का स्वागत करेंगे।
पांच बैंड और मशक बाजा के साथ शामिल होंगे हजारों श्रद्धालु
मंदिर समिति के अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ एवं महामंत्री महेन्द्र कासलीवाल ने बताया कि मंगल प्रवेश जुलूस में पांच आकर्षक बैंड शामिल होंगे। इनमें विशेष बैंड भटिंडा से पहुंचेगा। इसके साथ ही पारंपरिक मशक बाजा, पाठशाला के बच्चों का बैंड, विभिन्न जैन मंदिरों के श्रद्धालु, महिला मंडल और सकल जैन समाज बड़ी संख्या में भाग लेकर मुनिश्री का अभिनंदन करेंगे।
नसियां जी मंदिर पहुंचने पर पादप्रक्षालन, शास्त्र भेंट एवं मुनिश्री के मंगल प्रवचन आयोजित किए जाएंगे।
मंगल प्रवेश में रहेगा ड्रेस कोड
कोषाध्यक्ष मनीष मोहिवाल ने बताया कि मंगल प्रवेश जुलूस के लिए महिलाओं के लिए केसरिया साड़ी तथा पुरुषों के लिए सफेद कुर्ता-पायजामा निर्धारित किया गया है। विभिन्न महिला मंडल पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर आयोजन की गरिमा बढ़ाएंगे।
छह वर्ष बाद नसियां जी में फिर होगा चातुर्मास
हुकम जैन 'काका' ने बताया कि वर्ष 2019 में मुनि श्री विनीतसागर जी महाराज का चातुर्मास नसियां जी में आयोजित हुआ था। लगभग छह वर्षों बाद पुनः यह पावन अवसर प्राप्त हो रहा है, जिसे कोटा के धार्मिक एवं आध्यात्मिक इतिहास की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
46 वर्षों बाद राजस्थान की धरा पर हुआ ऐतिहासिक प्रवेश
निर्यापक मुनि श्री योगसागर जी महाराज ने लगभग 46 वर्षों बाद चंद्रोदय तीर्थ, चांदखेड़ी अतिशय क्षेत्र से राजस्थान की पावन धरा पर प्रवेश किया। क्षेत्र के अध्यक्ष हुकुमचंद जैन 'काका' सहित समाजजनों ने उनकी अगवानी कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इसके बाद मुनिश्री का विहार रामगंजमंडी, कोटा, बिजोलिया, अजमेर, आंवा, नैनवां, देई, खटकड़, केशोरायपाटन एवं तालेड़ा सहित अनेक क्षेत्रों से होता हुआ आगे बढ़ा। विहार के दौरान उन्होंने कई प्राचीन जिनालयों में दर्शन-वंदन कर श्रद्धालुओं को धर्मलाभ प्रदान किया।
संपूर्ण परिवार ने अपनाया मोक्ष मार्ग
उपाध्यक्ष धर्मचंद जैन एवं सुमित सेंकी ने बताया कि मुनि श्री योगसागर जी महाराज का पूर्व नाम ब्रह्मचारी अनंत जैन (अष्टगे) था। उनका जन्म 26 सितंबर 1956 को कर्नाटक के सदलगा (बेलगांव) में हुआ।
उनके पिता श्रीमलप्पा जैन, जो बाद में मुनि श्री मल्लीसागर जी महाराज बने तथा माता श्रीमन्ति जी, जिन्होंने आगे चलकर आर्यिका समयमति माताजी के रूप में दीक्षा ग्रहण की, संपूर्ण परिवार ने मोक्ष मार्ग अंगीकार किया।
उनके परिवार में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज, पट्टा चार्य श्री समयसागर जी महाराज और मुनि श्री उत्कृष्टसागर जी महाराज जैसे महान संत हुए। यह परिवार संपूर्ण रूप से जैन साधु-साध्वी परंपरा को समर्पित रहा।
दीक्षा एवं आध्यात्मिक यात्रा
ब्रह्मचर्य व्रत – 2 मई 1975, श्री महावीरजी (राजस्थान)
क्षुल्लक दीक्षा – 18 दिसंबर 1975, सोनागिरि (मध्यप्रदेश)
ऐलक दीक्षा – 19 नवंबर 1977, कुण्डलपुर (मध्यप्रदेश)
मुनि दीक्षा – 15 अप्रैल 1980, मोराजी सागर (मध्यप्रदेश)
दीक्षा गुरु – आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज
निर्यापक पद प्राप्ति – 8 मार्च 2019, बीना बारहा (मध्यप्रदेश)
तपस्वी, साहित्यकार और प्रेरक व्यक्तित्व
निर्यापक मुनि श्री योगसागर जी महाराज श्रेष्ठ वक्ता, कवि, साहित्यकार, तपस्वी, चिंतक एवं अध्यात्मप्रेमी हैं। उन्होंने अनेक प्रेरणादायी धार्मिक काव्य (हाइकु) कविताओं की रचना की है, जिनमें "आत्म शिल्पी आचार्य श्री विद्यासागर" विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
उन्होंने बारह भावना, चोबीस तीर्थंकर स्तुति सहित अनेक धार्मिक रचनाओं की सृजना की है। द्रव्य संग्रह की गाथा के अनुसार वे करोड़ों जाप कर चुके हैं और कठोर उपवास साधना के लिए भी विख्यात हैं। वर्ष 1993 में गोमटेश्वर बाहुबली महामस्तकाभिषेक में उनकी महत्वपूर्ण सहभागिता रही। उनके सान्निध्य में अनेक पंचकल्याणक, महाविधान, वेदी प्रतिष्ठा एवं धर्म प्रभावना के कार्य संपन्न हुए हैं।
गुरु के प्रति श्रद्धा से भावुक हुआ वर्षायोग
श्रद्धालुओं के अनुसार मुनिश्री की हार्दिक इच्छा थी कि राजस्थान प्रवेश के समय उन्हें अपने दीक्षा गुरु आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का सान्निध्य प्राप्त हो। लेकिन आचार्यश्री के ब्रह्मलीन हो जाने के कारण यह भाव पूर्ण नहीं हो सका। यही प्रसंग इस वर्षायोग को श्रद्धा, गुरु-भक्ति और भावनाओं से विशेष बना रहा है।
कोटा में आयोजित होने वाला यह चातुर्मास जैन समाज के साथ-साथ संपूर्ण हाड़ौती क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में दर्ज होगा।

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