कोटा। दान का वास्तविक फल केवल वस्तु के त्याग से नहीं, बल्कि दानदाता की निर्मल भावना, पात्र के प्रति श्रद्धा और आत्मकल्याण के उद्देश्य से प्राप्त होता है। धार्मिक संकल्प लेने के बाद कठिन परिस्थितियों में भी व्रत और संयम का दृढ़ता से पालन करना चाहिए। यह संदेश निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज ने गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को श्री पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियाजी, दादाबाड़ी, कोटा में धर्मसभा को संबोधित करते हुए दिया।

मुनिश्री ने रत्नकरण्ड श्रावकाचार के श्लोक क्रमांक 114 एवं 115 पर प्रवचन करते हुए दान, नवधा भक्ति, व्रत-संयम, विनम्रता और श्रद्धा के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि धार्मिक संकल्प लेने के बाद व्यक्ति को अपने व्रत और संयम में कभी कमी नहीं आने देनी चाहिए। परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अपनी प्रतिज्ञा का दृढ़ता से पालन करना आवश्यक है। धर्म के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति के लिए संकल्प की दृढ़ता और भावों की निर्मलता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जिनेंद्र भगवान की पूजा-अर्चना के संबंध में मुनिश्री ने कहा कि केवल बाहरी क्रियाओं और पूजन सामग्री पर ध्यान देने के बजाय अपने भावों की शुद्धता को प्राथमिकता देनी चाहिए। द्रव्य और भाव, दोनों की दृष्टि से नमन एवं पूजा का महत्व है। उन्होंने दान की महत्ता बताते हुए कहा कि जिस प्रकार जल रक्त के प्रवाह को रोकने में सहायक होता है, उसी प्रकार गृहस्थ अपनी सामर्थ्य और पात्रता के अनुसार त्यागी मुनिराजों को चतुर्विध दान देकर संचित पापों के क्षय में सहायक बन सकता है।

मुनिश्री ने बड़ों और गुरुजनों के प्रति विनम्रता रखने की प्रेरणा देते हुए कहा कि व्यक्ति जितना विनम्र होता है, उतना ही हल्का होकर आध्यात्मिक ऊंचाइयों की ओर बढ़ता है। गुरु के चरणों में झुकना चाहिए और उनके साथ अहंकारपूर्ण तर्क-वितर्क से बचना चाहिए। जहां अहंकार और अनावश्यक वाद-विवाद होता है, वहां सच्ची श्रद्धा और भक्ति का विकास कठिन हो जाता है।

आचार्य कुंदकुंद स्वामी के संदर्भ में मुनिश्री ने बताया कि उन्हें "वक्रग्रीवाचार्य" भी कहा जाता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि उनकी गर्दन स्वभाव से टेढ़ी थी, बल्कि उन्होंने अपने ज्ञान और शास्त्रार्थ के माध्यम से अन्य मतावलंबियों को पराजित कर उनका सिर झुका दिया था। यह प्रसंग उनके ज्ञान की शक्ति और आध्यात्मिक प्रभाव को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि विश्वास और पवित्र भावों के साथ किया गया धर्माचरण उज्ज्वल एवं निर्मल परिणाम देता है। दान में वस्तु से अधिक महत्व दानदाता की भावना, पात्र के प्रति श्रद्धा और आत्मकल्याण की भावना का है।

श्री पुण्योदय अतिशय क्षेत्र में आयोजित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं ने भक्तिभावपूर्वक सहभागिता कर पुण्यार्जन किया। प्रशासनिक मंत्री श्रीमती अर्चना जैन सर्राफ ने बताया कि श्रावक श्रेष्ठी सम्मान, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट का पुण्यलाभ प्राप्त करने वाले परिवारों के नाम तथा कलश स्थापना के पुण्यार्जक परिवार का विवरण प्राप्त होना शेष है।

श्री सुमित सेंकी एवं श्री मनोज बगड़ा ने बताया कि शांतिधारा का पुण्यार्जन श्रीमती सुमित्रा, पंकज एवं अरुण कंसल परिवार; श्रीमान माणकचंद, श्रीमती लाड देवी एवं अरिहंत लुहाडिया परिवार; श्रीमान संजोग, संस्कार एवं सोनल सहजपुर तथा श्रीमती सुशीला बाई, अशोक एवं राजकुमार ठोरा परिवार ने प्राप्त किया।

भक्तामर विधान में भी श्रद्धालुओं ने भक्तिभावपूर्वक भाग लेकर पुण्यार्जन किया। श्री सुनील माडिया के अनुसार, मुनि श्री योगसागर जी महाराज के आहारदान का पुण्यलाभ अन्तिम बगडा को प्राप्त हुआ, वहीं मुनि श्री प्रणवसागर जी महाराज के आहारदान का सौभाग्य को प्राप्त हुआ।

धर्मसभा के समापन पर श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री की पूजन-अर्चना की, अर्घ्य समर्पित किए तथा जिनवाणी वंदना कर धर्मलाभ अर्जित किया। प्रवचन में मुनिश्री ने व्रत-संयम की दृढ़ता, गुरुजनों के प्रति विनम्रता और पात्र के प्रति श्रद्धाभाव को धर्माचरण एवं दान की सार्थकता का आधार बताया।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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