कोटा: मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में गूंजेगी दहाड़, बदलेगी हाड़ौती पर्यटन की तस्वीर; पर्यटकों को मिलेंगी वर्ल्ड क्लास सुविधाएं
कोटा के मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में जल्द शिफ्ट होगी बांधवगढ़ की मादा बाघिन और खुलेंगे पांच नए सफारी मार्ग। होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान और सीसीएफ सुगनाराम जाट की बैठक में चंबल सफारी और जेटी किशोरपुरा पर आधुनिक सुविधाओं के विस्तार पर बनी सहमति। जानिए कैसे हाड़ौती पर्यटन की तस्वीर बदलने जा रही है और पर्यटकों को क्या नई सुविधाएं मिलेंगी।

कोटा। राजस्थान का शैक्षणिक हब अब देश के प्रमुख पर्यटन मानचित्र पर अपनी चमक बिखेरने को तैयार है। हाड़ौती अंचल के पर्यटन को नई ऊंचाइयां देने के लिए कोटा में बड़े बदलाव की नींव रखी जा चुकी है। होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान (कोटा डिवीजन) और मुकुंदरा रामगढ़ टाइगर संस्था के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) सुगनाराम जाट से भेंट कर मुकुंदरा टाइगर रिजर्व और चंबल सफारी को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से लैस करने का खाका खींचा। इस मुलाकात के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ से जल्द ही एक मादा बाघिन को मुकुंदरा के जंगलों में शिफ्ट किया जाएगा, जिससे यहां वन्यजीव प्रेमियों का रोमांच दोगुना होना तय है।
होटल फेडरेशन के संभागीय अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी ने बैठक के दौरान जोर देते हुए कहा कि 'कोटा हाड़ौती ट्रैवल मार्ट' की सफलता के बाद देशभर के टूर ऑपरेटरों की पहली पसंद गराड़िया महादेव, चंबल सफारी और मुकुंदरा टाइगर रिजर्व बन चुके हैं। पर्यटकों के बढ़ते रुझान को देखते हुए जे.टी. किशोरपुरा स्थित चंबल सफारी प्रस्थान स्थल पर बैठने के लिए आधुनिक शेड, गुणवत्तापूर्ण कैंटीन और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विकास अनिवार्य है। माहेश्वरी ने मुकुंदरा में सफारी के लिए टीसीपी (TCP) की अनुमति मिलने के बाद कोर एरिया सहित पांचों पर्यटन मार्गों को तुरंत खोलने की पुरजोर वकालत की, ताकि पर्यटन सीजन का भरपूर लाभ उठाया जा सके।
संरक्षण और विकास की इस कड़ी में मुकुंदरा रामगढ़ टाइगर संस्था के अध्यक्ष दौलत सिंह शक्तावत एवं सचिव कोशल बंसल ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि बाघों के सुरक्षित पर्यावास और निर्बाध विचरण के लिए दामोदरपुर गांव का विस्थापन किया जाना समय की मांग है, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। होटल फेडरेशन के सचिव कोशल बंसल ने भी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर बल दिया।
इन प्रस्तावों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए मुख्य वन संरक्षक सुगनाराम जाट ने आश्वस्त किया कि विभाग ने किशोरपुरा में शेड निर्माण और कैंटीन स्थापना की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने घोषणा की कि बांधवगढ़ से मादा बाघिन को लाने का कार्य अनुकूल समय के भीतर संपन्न किया जाएगा और पर्यटकों के लिए नए सफारी मार्गों को खोलने की प्रक्रिया को भी गति दी जा रही है। साथ ही, सफारी के लिए कंटेनर जिप्सी का पंजीकरण शुरू कर दिया गया है ताकि वाहनों की कमी न हो।
भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए अशोक माहेश्वरी ने बताया कि जिला प्रशासन, कोटा विकास प्राधिकरण और पर्यटन विभाग के सामूहिक प्रयासों से आने वाले सीजन तक कोटा में एक मजबूत पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर दिया जाएगा। निर्माणाधीन 'भारतमाला रोड' इस विकास यात्रा में गेम-चेंजर साबित होगी, जिससे पर्यटकों का आवागमन सुगम होगा। कोटा अब केवल कोचिंग के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीव वैभव के लिए भी दुनिया भर के पर्यटकों का स्वागत करने को तैयार है।

Pratahkal Bureau
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