कोटा में मानसून अलर्ट: डकनिया गोविंद नगर अंडरपास बना खतरा, टीम जीवनदाता ने चेताया
कोटा में मानसून को लेकर टीम जीवनदाता ने डकनिया गोविंद नगर अंडरपास समेत संवेदनशील क्षेत्रों पर चेतावनी जारी कर नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की।

तस्वीर में कोटा के डकनिया रेलवे अंडरपास में भरे पानी के पास खड़े होकर टीम जीवनदाता के सदस्य स्थिति का जायजा लेते नजर आ रहे हैं। (बाएं से दाएं) महेंद्र सिंह, रामप्रसाद मीणा, नितिन मेहता, धीरेंद्र पोरवाल, रजनीश खंडेलवाल और भुवनेश गुप्ता अंडरपास की ओर इशारा करते हुए।
मानसून के सक्रिय होने के साथ कोटा शहर और आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश की संभावना बढ़ गई है। हर वर्ष की तरह इस बार भी जलभराव, उफनते नाले, क्षतिग्रस्त सड़कें, खुले मैनहोल और निचले इलाकों में पानी भरने जैसी समस्याएं चुनौती बन सकती हैं। कोटा बैराज व अन्य बांधों से पानी छोड़े जाने के साथ जल प्रवाह तेज हो जाता है और कई कॉलोनियां जलमग्न हो जाती हैं। ऐसे में टीम जीवनदाता ने लोगों से अभी से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है।
टीम जीवनदाता के संरक्षक व संयोजक भुवनेश गुप्ता ने अपनी टीम के साथ शहर के कई स्थानों का निरीक्षण किया और ऐसे स्थानों पर साइन बोर्ड लगाने का निर्णय लिया, जो बरसात के दौरान हादसों का कारण बन सकते हैं। भुवनेश गुप्ता ने बताया कि गोविंद नगर डकनिया रेलवे अंडरपास की स्थिति बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि यदि तेज बारिश होती है तो यहां पानी भर जाएगा, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी और वे यहां से निकल नहीं सकेंगे। उन्होंने बताया कि बारिश नहीं होने पर भी इस अंडरपास में पानी भरा रहता है, जिससे आमजन को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस दौरान नितिन मेहता, धीरेंद्र पोरवाल, रजनीश खंडेलवाल, भगत शर्मा, महेंद्र सिंह और रामप्रसाद मीणा ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया तथा प्रशासन से आवश्यक सुधार कराने की मांग उठाई।
भुवनेश गुप्ता ने कहा कि जिला प्रशासन, नगर निगम, आपदा प्रबंधन विभाग और संबंधित एजेंसियां मानसून को लेकर तैयारियों में जुटी हुई हैं, लेकिन किसी बड़ी दुर्घटना को टालने में नागरिकों की सतर्कता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि बरसात के दौरान कोटा शहर के कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन जाती है। निचले इलाकों, अंडरपास और नालों के आसपास विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। कई बार तेज बहाव के कारण सड़क और नाले का अंतर दिखाई नहीं देता, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे स्थानों पर वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए।
टीम जीवनदाता के नितिन मेहता और भगत शर्मा ने कहा कि बारिश के दौरान उफनते नालों और पुलियाओं को पार करने का प्रयास कभी नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ मिनटों की जल्दबाजी जानलेवा साबित हो सकती है। यदि किसी क्षेत्र में पानी का बहाव तेज हो तो सुरक्षित स्थान पर रुकना ही सबसे बेहतर विकल्प है। उन्होंने बताया कि शहर में कई स्थानों पर सड़कें पहले से ही क्षतिग्रस्त हैं। बारिश के दौरान गड्ढे पानी से भर जाते हैं और दिखाई नहीं देते, जिससे दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक हादसों का शिकार होते हैं। ऐसे में फिसलन भरी सड़कों पर तेज गति से वाहन चलाने से बचना चाहिए तथा आवश्यक होने पर ही यात्रा करनी चाहिए।
रजनीश खंडेलवाल ने कहा कि बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए खुले मैदान, पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। उन्होंने घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में विद्युत सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हुए कहा कि यदि कहीं बिजली के तार टूटे हुए दिखाई दें तो तत्काल संबंधित विभाग को सूचना दें और उनसे दूरी बनाए रखें। उन्होंने यह भी कहा कि घरों में खराब विद्युत उपकरणों की समय रहते मरम्मत कराएं, खुले तारों को सुरक्षित ढंग से कवर करें तथा कूलर, वाशिंग मशीन और अन्य उपकरणों के प्लग स्विच से निकालकर रखें। उन्होंने लोगों से मौसम विभाग और जिला प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करने, अफवाहों पर विश्वास नहीं करने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की। साथ ही किसी भी आपात स्थिति, जलभराव, पेड़ गिरने, सड़क धंसने या अन्य दुर्घटना की सूचना तत्काल प्रशासन, पुलिस या संबंधित विभाग को देने का आग्रह किया।

Pratahkal Bureau
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