मोक्ष सप्तमी पर गूंजे भगवान पारसनाथ के जयकारे, 23 किलो का निर्वाण लाडू चढ़ाया
कोटा के रिद्धि-सिद्धि नगर स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में मोक्ष सप्तमी पर भगवान पारसनाथ का निर्वाण महोत्सव मनाया गया। 23 किलो का निर्वाण लाडू चढ़ाया गया और विशेष झांकी का लोकार्पण हुआ।

तस्वीर में कोटा के कुन्हाड़ी स्थित जैन मंदिर में मोक्ष सप्तमी के अवसर पर भगवान पारसनाथ के निर्वाण महोत्सव के दौरान उपस्थित श्रद्धालु और मुनिगण नजर आ रहे हैं।
कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के अंतर्गत गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ससंघ (6 पिच्छी) के चातुर्मासिक प्रवास के दौरान बुधवार को मोक्ष सप्तमी के पावन अवसर पर भगवान पारसनाथ का निर्वाण महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस दौरान भगवान पारसनाथ के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा और प्रभु चरणों में 23 किलो का निर्वाण लाडू अर्पित किया गया।
प्रवचन के दौरान गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ने भगवान पारसनाथ के जीवन से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि साधना के मार्ग में कैसी भी विपरीत परिस्थितियां आएं, साधक को अपना धैर्य और समता भाव नहीं छोड़ना चाहिए। भगवान पारसनाथ के जीवन में आए उपसर्गों का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि कमठ द्वारा किए गए उपसर्ग के बावजूद भगवान पारसनाथ ने शांत भाव बनाए रखा। इसी प्रकार पूर्व भव के संस्कारों और कर्मों के प्रभाव से उत्पन्न परिस्थितियों में भी भगवान ने क्षमा, करुणा और समता का परिचय दिया। उनके जीवन का संदेश है कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा व पंकज खटोड ने बताया कि मोक्ष सप्तमी के अवसर पर भगवान पारसनाथ की टोंक की विशेष धार्मिक भावनाओं के साथ पूजा-अर्चना की गई। अभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य नरेंद्र-पवन सेठिया परिवार को प्राप्त हुआ। पाद पक्षालन का सौभाग्य विनोद-शशिबाला, शुभम एवं विपुल सारसोप परिवार को प्राप्त हुआ।
कोषाध्यक्ष ताराचंद बडला ने बताया कि तेइसवें तीर्थंकर भगवान पारसनाथ के निर्वाण महोत्सव के अवसर पर प्रभु चरणों में 23 किलो का निर्वाण लाडू अर्पित करने का सौभाग्य नाथूलाल एवं अशोक कुमार सांवला परिवार को प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ निर्वाण लाडू अर्पित कर भगवान पारसनाथ के मोक्ष कल्याणक की आराधना की।
इस अवसर पर सम्मेद शिखरजी की रचना पर आधारित विशेष झांकी का भी लोकार्पण किया गया। झांकी के लोकार्पण का सौभाग्य श्रीमती कमलादेवी, लोकेश जी एवं डॉ. दीप्ति जी सोनी परिवार, सीसवाली वालों को प्राप्त हुआ। झांकी ने सम्मेद शिखरजी की पावनता और भगवान पारसनाथ के निर्वाण कल्याणक की स्मृति को सजीव रूप प्रदान किया।
गुरु सेवा संघ परिवार के अध्यक्ष विनोद सिंघल सारसोप परिवार को परम पूज्य गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज का पाद पक्षालन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
धर्मसभा में अध्यक्ष प्रकाश बज, पदम बड़ला, संरक्षक विमल नांता, मनोज जैसवाल, नरेंद्र सेठिया, संजय सांवला, बसंतीलाल पाटनी, विनोद सारसोप, जम्बू बज, मनीष सेठी, स्वतंत्र पाटनी, अनिल हरसोरा, अनिल बड़जात्या सहित गुरु सेवा संघ परिवार के सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर भगवान पारसनाथ के जयकारों, भक्ति और धार्मिक उल्लास से गूंजता रहा।

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