कोटा मेडिकल कॉलेज: राखी गौतम ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल
कोटा के जे.के. लोन अस्पताल में प्रसूताओं की मृत्यु के बाद कांग्रेस नेता ने स्टाफ की कमी और खराब दवा आपूर्ति को लेकर राज्य सरकार को घेरा।

कोटा मेडिकल कॉलेज और जे.के. लोन अस्पताल में प्रसूताओं की मृत्यु के बाद सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर कांग्रेस अध्यक्ष राखी गौतम ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी और गुणवत्ता पूर्वक दवा आपूर्ति व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं, जिनके कारण ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
राखी गौतम ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार सत्ता में आने के बाद चिकित्सा विभाग में लाखों भर्तियों के दावे करती रही, लेकिन धरातल पर स्थिति शून्य बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कोटा के राजकीय अस्पतालों में जरूरत के हिसाब से स्थायी कर्मचारियों की कमी है, जिसके चलते मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा और यही लापरवाही इस गंभीर घटना का कारण बनी।
उन्होंने बताया कि राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में स्पष्ट नियम है कि राजकीय अस्पतालों में उपलब्ध बेडों के अनुपात में नर्सिंग स्टाफ और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति होना अनिवार्य है। इसके बावजूद अस्पतालों में पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं है। गौतम ने मांग की कि मरीजों की संख्या और अस्पतालों के बेडों के अनुपात में स्थायी भर्ती की जाए, ताकि चिकित्सा सेवाएं प्रभावी ढंग से संचालित हो सकें। उन्होंने कहा कि संविदा और ठेका व्यवस्था पर निर्भर स्वास्थ्य सेवाओं से गंभीर परिस्थितियों का समाधान संभव नहीं है।
राखी गौतम ने कहा कि डॉक्टरों की कमी भी कोटा की घटना का बड़ा कारण है। उन्होंने आरोप लगाया कि संविदा डॉक्टरों के भरोसे अस्पतालों की व्यवस्था चलाना मरीजों के जीवन के साथ जोखिम उठाने जैसा है। उन्होंने सरकार से जिम्मेदार और स्थायी डॉक्टरों की भर्ती करने की मांग की, ताकि अस्पतालों में जवाबदेही तय हो सके और मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके।
दवा आपूर्ति व्यवस्था को लेकर भी राखी गौतम ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMSCL) राज्य में चिकित्सा विभाग का सबसे मजबूत और विश्वसनीय दवा वितरण केंद्र है। वर्षों से यही संस्था राजकीय अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति करती रही है, इसलिए 90 प्रतिशत दवाइयों की खरीद RMSCL के माध्यम से ही की जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में कोटा मेडिकल अस्पताल प्रशासन ने अलग-अलग कंपनियों और निजी सप्लायर्स को दवा आपूर्ति का जिम्मा दे रखा है, जिसका परिणाम कोटा की घटना के रूप में सामने आया। गौतम ने कहा कि यदि दवाइयों की खरीद एक ही विश्वसनीय संस्था RMSCL से की जाए तो दवाओं की गुणवत्ता की प्रभावी जांच संभव होगी, अनावश्यक भटकाव रुकेगा और कोटा जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
राखी गौतम ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में स्थायी भर्ती, जवाबदेह चिकित्सा व्यवस्था और गुणवत्ता आधारित दवा आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अस्पतालों में स्टाफ और दवाओं की कमी दूर नहीं की गई तो भविष्य में भी मरीजों को इसी प्रकार की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

Pratahkal Bureau
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