कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत पर घिरी सरकार, राखी गौतम का हमला
कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत के 10 दिन बाद पहुंचे चिकित्सा मंत्री, शहर जिलाध्यक्ष राखी गौतम ने दौरे को केवल औपचारिकता और फोटो-ऑप बताया।

कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत के मामले में 14 मई 2026 को चिकित्सा मंत्री के दौरे के विरोध में प्रेस नोट जारी कर जवाबदेही की मांग करतीं कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष राखी गौतम।
कोटा, 14 मई 2026 कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत के गंभीर मामले को 10 दिन गुजर जाने के बाद चिकित्सा मंत्री कोटा दौरे पर आए, जिस पर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं। इस संवेदनशील मामले पर शहर जिलाध्यक्ष राखी गौतम ने एक प्रेस नोट जारी कर सरकार और चिकित्सा मंत्री को आड़े हाथों लिया है। राखी गौतम ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि ऐसा दौरा अत्यंत निंदनीय है जो केवल फोटो खिंचवाने के लिए आयोजित किया गया हो। उन्होंने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि मंत्री के पास पीड़ितों की गुहार सुनने तक का समय नहीं है, जबकि आज जनता को जवाब चाहिए, न कि कोई फोटो-ऑप।
शहर जिलाध्यक्ष राखी गौतम ने विस्तृत रूप से कहा कि मंत्री के इस पूरे दौरे में संवेदनशीलता और जवाबदेही का घोर अभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला है। अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती प्रसूताओं के परिजन न्याय और सुनवाई की आस में लगातार बैठे रहे, लेकिन चिकित्सा मंत्री उनसे मिलने तक नहीं पहुंचे। मंत्री ने न तो उनकी कोई गुहार सुनी और ना ही उनकी पीड़ा को जानने का प्रयास किया, जो कि चिकित्सा मंत्री की संवेदनहीनता का सबसे बड़ा सबूत है। गौतम के अनुसार, यह दौरा केवल एक औपचारिकता बनकर रह गया, जहां मंत्री आए, फोटो-वीडियो खिंचवाया और वापस लौट गए।
राखी गौतम ने डबल इंजन की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब जनता को जवाबदेही और संवेदना की सबसे अधिक जरूरत है, तब सरकार के मंत्री महज फोटो-ऑप में व्यस्त हैं, जो सरकार की असंवेदनशीलता और नाकामी को पूरी तरह उजागर करता है। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह डबल इंजन की सरकार जनता की पीड़ा सुनने और जिम्मेदारी लेने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। कोटा मेडिकल कॉलेज में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के बीच मरीजों के परिजनों के मुंह से चिकित्सा व्यवस्था के बुरे हाल तक सुनना भी मंत्री महोदय को जरूरी नहीं लगा, जिससे स्पष्ट होता है कि शासन व्यवस्था आमजन की तकलीफों के प्रति कितनी विमुख हो चुकी है।

