कोटा मेडिकल कॉलेज में विगत दिनों प्रसूताओं के जीवन के साथ कथित खिलवाड़ और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से दो प्रसूताओं की मौत के मामले को लेकर गुरुवार को राजनीतिक माहौल गरमा गया। मेडिकल कॉलेज के सामने जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से शहर अध्यक्ष राखी गौतम और देहात अध्यक्ष भानूप्रताप की अगुवाई में धरना-प्रदर्शन किया गया तथा सरकार के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया गया।

धरना दोपहर 3.30 बजे शुरू हुआ, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही और उपेक्षा के आरोप लगाए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने “10 मुखी रावण रूपी सरकार” का पुतला दहन किया, जिसमें एक ओर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, स्थानीय विधायक संदीप शर्मा, चिकित्सा मंत्री, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के चेहरे लगाए गए थे, वहीं दूसरी ओर अस्पताल के प्रधानाचार्य, अधीक्षक सहित पूरे प्रशासन को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया।

प्रदर्शन के दौरान शहर अध्यक्ष राखी गौतम ने आरोप लगाया कि यह लापरवाही नहीं बल्कि “सीधी हत्या” है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा मंत्री को अब तक घटनास्थल पर पहुंचने के निर्देश नहीं मिले, जबकि अस्पताल प्रशासन एक मौत के बाद भी नहीं जागा और दूसरी प्रसूता की मौत तक स्थिति बिगड़ती रही। उन्होंने बताया कि मृतक परिजनों की ओर से पांच प्रमुख मांगें रखी गई थीं, जिनमें दोषियों पर कार्रवाई, दवाइयों की जब्ती व जांच, उच्चस्तरीय मजिस्ट्रेट जांच, मृतक परिवारों को 10 लाख रुपये मुआवजा तथा गंभीर रूप से प्रभावित महिलाओं को 5 लाख रुपये मुआवजा और नि:शुल्क इलाज शामिल है।

कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस दौरान महिलाओं ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं सरकार को प्रतीकात्मक रूप से चूड़ियां भी भेंट कीं।

कोटा जिला प्रभारी पुष्पेन्द्र भारद्वाज ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री को अब तक निर्देश नहीं मिले हैं कि वे कोटा आकर मामले का संज्ञान लें। उन्होंने कहा कि पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के निर्देश पर जांच कमेटी गठित की गई है, जो रिपोर्ट तैयार कर शीघ्र प्रस्तुत करेगी।

देहात अध्यक्ष भानूप्रताप ने कहा कि सरकार “कुंभकरण की नींद” में सो रही है और अभी तक किसी स्तर पर जांच नहीं कराई गई है। विधायक चेतन पटेल, पूर्व प्रधान नईमुद्दीन गुड्डू, सह प्रभारी धर्मराज मेहरा सहित कई नेताओं ने भी सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और न्यायिक जांच की मांग की।

धरने में पूर्व अध्यक्ष रविन्द्र त्यागी, पूर्व विधायक पूनम गोयल, पीसीसी सचिव शिवराज गुंजल, निवर्तमान महापौर पवन मीणा, एनएसयूआई अध्यक्ष विशाल मेवाड़ा, महिला कांग्रेस पदाधिकारी गायत्री मीणा, सुमन मठ सिंघला सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कांग्रेस महासचिव डॉ. विजय सोनी ने किया।

इसी प्रकरण में पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है, जिसमें पूर्व चिकित्सा मंत्री परसादीलाल मीणा, विधायक डूंगर राम गेदर, पीसीसी महासचिव एवं कोटा जिला प्रभारी पुष्पेन्द्र भारद्वाज तथा डॉ. विकास महला (प्रदेश अध्यक्ष चिकित्सा प्रकोष्ठ) शामिल हैं। यह कमेटी अस्पताल और पीड़ित परिवारों से मिलकर तीन दिवस के भीतर रिपोर्ट तैयार कर पीसीसी अध्यक्ष को सौंपेगी।

यह पूरा मामला कोटा की चिकित्सा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, जिसके चलते राजनीतिक सरगर्मी लगातार तेज होती जा रही है।

Pratahkal Bureau

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