कोटा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चिकित्सा विभाग की घोर लापरवाही के चलते एक और प्रसूता की मौत ने सियासी और सामाजिक आक्रोश को जन्म दे दिया है। गुरुवार को शहर जिला कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर कांग्रेस नेता विद्याशंकर गौतम की अगुवाई में कांग्रेस जनों और मृतका के परिजनों ने मेडिकल कॉलेज के मुख्य गेट पर डेरा डाल दिया। कई घंटों तक चले इस विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने दबाव बनाकर धरने को समाप्त करवाया, जिसे लेकर अब प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

धरने का नेतृत्व कर रहे विद्याशंकर गौतम ने अस्पताल प्रशासन पर तीखे प्रहार करते हुए कहा कि प्रदेश में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन की कुप्रबंधन के कारण व्यवस्थाएं चौपट हैं। हाल ही में कांग्रेस जिलाध्यक्ष राखी गौतम ने प्रधानाचार्य का घेराव कर चेतावनी दी थी कि भर्ती महिलाओं का समुचित उपचार सुनिश्चित किया जाए, किंतु अस्पताल की अनदेखी के चलते गंभीर रूप से ग्रसित पांच महिलाओं में से एक ने आज सुबह दम तोड़ दिया। गौतम ने इसे लापरवाही नहीं बल्कि 'सीधी हत्या' करार देते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई और निलंबन की मांग की। उन्होंने बताया कि अब तक दो महिलाओं की मौत हो चुकी है और चार महिलाएं गलत इलाज के कारण जीवन-मौत के बीच जूझ रही हैं।

विरोध स्थल पर पहुंचे पिपल्दा विधायक चेतन पटेल, देहात कांग्रेस अध्यक्ष भानूप्रताप सिंह, पूर्व लाडपुरा प्रधान नईमुद्दीन गुड्डू और हरपाल सिंह राणा ने एकजुट होकर दोषी चिकित्सकों के तुरंत निलंबन, पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराने की मांग रखी। जिला उपाध्यक्ष अनुराग गौतम ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारी तंत्र की विफलता माताओं की जान ले रही है, अतः दोषियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। एनएसयूआई जिलाध्यक्ष विशाल मेवाड़ा ने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए मेडिकल कॉलेज अस्पताल को 'मौत का केंद्र' बताया और पीड़ितों को न्याय दिलाने का संकल्प दोहराया।

विरोध के अनोखे स्वरूप में मंडल अध्यक्ष चेतन सोलंकी ने अपना सिर मुंडवाकर सोई हुई सरकार को जगाने का प्रयास किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, यह संघर्ष थमेगा नहीं। महासचिव डॉ. विजय सोनी के अनुसार, इस विशाल धरने में देवा भड़क, योगेश विजय, वसिम भाटी, मनीष पारेता, सिद्दीक अंसारी, शानू इनायत और योगेश चावला सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रशासन द्वारा प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाए जाने के बावजूद, इस घटना ने कोटा के चिकित्सा जगत और सरकार की संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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