कोटा, 11 अप्रैल। माली सैनी युवा जागृति मंच के तत्वावधान में शनिवार को सामाजिक क्रांति के अग्रदूत महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर किशोरपुरा स्थित माली समाज छात्रावास परिसर में स्थापित महात्मा फुले की प्रतिमा पर पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों और गणमान्य नागरिकों ने भाग लेकर उन्हें नमन किया।

महात्मा फुले के जीवन दर्शन और सामाजिक योगदान पर चर्चा

मंच के अध्यक्ष मुकेश बघेल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महात्मा ज्योतिबा फुले के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि "महात्मा फुले भारत के प्रथम समाज सेवक थे, जिन्होंने देश में शिक्षा की अलख जगाने के लिए पहला बालिका स्कूल खोला था।" बघेल ने बताया कि महात्मा फुले ने 'गुलामगिरी' जैसी कालजयी पुस्तक के माध्यम से समाज को जागृत किया और जीवनभर दलितों, पिछड़ों व शोषितों के हक की लड़ाई लड़ी। उन्होंने छुआछूत, जाति प्रथा और दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों का न केवल विरोध किया, बल्कि समाज को इन बुराइयों से मुक्त करने के लिए धरातल पर कार्य किया।

डॉ. अंबेडकर के वैचारिक गुरु और आधुनिक भारत की नींव

विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बघेल ने बताया कि महात्मा फुले ही संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के वैचारिक गुरु थे, जिनके पदचिन्हों पर चलकर आधुनिक भारत के निर्माण की नींव रखी गई। इस अवसर पर व्यापार संघ के अध्यक्ष प्रदीप सुमन, सीता देवी अखाड़ा समिति के गुरु जगदीश चंद्र सुमन, और कोटा यूनिवर्सिटी के महासचिव दीपक सुमन, रामेश्वर सुमन, अमित शर्मा, राकेश नागर, सोनू, धनराज सुमन, लोकेश सुमन, गुरु प्रकाश सुमन, हेमलता सुमन और जगदीश सुमन सहित बड़ी संख्या में युवा और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

Pratahkal Bureau

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