कोटा के तलवंडी स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में बुधवार को भक्ति, श्रद्धा और अनुशासन का संगम देखने को मिला, जब तीन दिवसीय श्रुत पंचमी महापर्व का भव्य आगाज ध्वजारोहण और मांगलिक अनुष्ठानों के साथ हुआ। यह आयोजन आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं नवाचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्यों—मुनि श्री 108 निरोग सागर जी, मुनि श्री 108 निर्मोह सागर जी, मुनि श्री 108 निरामय सागर जी तथा मुनि श्री 108 निर्भीक सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हो रहा है। इस धार्मिक उत्सव के शुभारंभ के साथ ही पूरा क्षेत्र धर्ममय हो गया और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया।

महापर्व के प्रथम दिन का मुख्य आकर्षण ‘आचार्य छत्तीस महामंडल विधान’ रहा, जो आचार्य परमेष्ठि के 36 मूलगुणों की आराधना को समर्पित है। श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर समिति के महामंत्री प्रकाश सामरिया ने बताया कि इस तीन दिवसीय आयोजन में आचार्य छत्तीसी विधान के साथ-साथ भक्तामर विधान और श्रुत स्कंध विधान संपन्न कराए जाएंगे। मुनि श्री 108 निरोग सागर जी ने विधान की महिमा बताते हुए स्पष्ट किया कि आचार्य के 36 गुणों में त्रिगुप्ति, पंचाचार, षट् आवश्यक, 12 तप एवं 10 धर्मों का विशेष स्थान है। इन गुणों का स्मरण और पूजन श्रद्धालुओं को आचार्य पद के उच्च आदर्शों को अपने जीवन में उतारने के लिए प्रेरित करता है।

कार्यक्रम के दौरान ध्वजारोहण का पुण्य लाभ वंदना बड़जात्या परिवार को प्राप्त हुआ, जबकि सौधर्म इंद्र के रूप में अजय जैन एवं उपेंद्र जैन (सीए) परिवार ने अपनी सहभागिता निभाई। द्रव्य पुण्यार्जक के रूप में सुरेश हरसौरा, निर्मल हरसौरा, निहाल, राहुल एवं रोहित परिवार ने अनुष्ठान में योगदान दिया। मुनि श्री 108 निरामय सागर जी महाराज ने अभिषेक और शांतिधारा की विधियों का सूक्ष्मता से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को इनके आध्यात्मिक लाभ और सही प्रक्रिया से अवगत कराया। विधान की समस्त क्रियाएं भैयाजी, आदि कुमार जी एवं अनिल डाबी के कुशल निर्देशन में संपन्न हुई।

इस आयोजन में सकल जैन समाज की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिसमें जे.के. जैन, मनोज जैसवाल, पारस सोगानी, राजकुमार लुहाड़िया, मनोज पाटनी सहित बड़ी संख्या में समाज बंधु सम्मिलित हुए। आयोजन की सफलता में तलवंडी युवा शक्ति की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही, जो मुनि संघ के प्रवास और अनुशासित व्यवस्थाओं के संचालन में निरंतर सक्रिय है। यह महापर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि धर्म, तप और आचार की साधना का एक ऐसा मार्ग है जो समाज को अध्यात्म और आत्म-कल्याण की ओर अग्रसर करता है।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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