कोटा के तलवंडी स्थित श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय श्रुत पंचमी महोत्सव के दूसरे दिन आध्यात्मिक उमंग और भक्ति की पराकाष्ठा देखने को मिली। गुरुवार का दिन पूर्णतः प्रभु भक्ति और आत्म-कल्याण के भावों को समर्पित रहा, जहाँ प्रातःकाल भक्तामर विधान के आयोजन ने श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति प्रदान की, वहीं सायंकाल आयोजित भजन संध्या ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण, प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुई, जिसके बाद श्रद्धालुओं ने भक्तामर विधान में सम्मिलित होकर विश्व शांति एवं मानव कल्याण की कामना की।

इस धार्मिक आयोजन में आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं नवाचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री 108 निरोग सागर जी, मुनि श्री 108 निर्मोह सागर जी, मुनि श्री 108 निरामय सागर जी एवं मुनि श्री 108 निर्भीक सागर जी महाराज का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री 108 निर्मोह सागर जी महाराज ने भक्तामर स्तोत्र की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसके प्रत्येक काव्य में सम्यक् दर्शन और आत्मकल्याण का संदेश छिपा है, जो भक्तों की आत्मशक्ति को जागृत कर कर्मों की निर्जरा का मार्ग प्रशस्त करता है।

विधान के अंतर्गत सौधर्म इंद्र परिवार के रूप में राजेश, किरण, रक्षिता एवं सर्वज्ञ मंगलम परिवार ने जिम्मेदारी निभाई, जबकि द्रव्य पुण्यर्जक के रूप में निहाल, राहुल एवं रोहित धनोप्या परिवार की सहभागिता रही। इसी दौरान धर्मनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक मनाते हुए अशोक एवं मंजू पहाड़िया परिवार द्वारा निर्वाण लाडू समर्पित किया गया। सायंकाल आयोजित भजन संध्या में जबलपुर के सुप्रसिद्ध भजन गायक विनोद भैया ने अपनी ओजस्वी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। जैन संस्कृति और गुरु भक्ति पर आधारित भजनों की स्वर लहरियों से पूरा परिसर देर रात तक गुंजायमान रहा।

महोत्सव के इस गरिमापूर्ण आयोजन में समाज के वरिष्ठजन, महिला मंडल और युवाओं की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर अशोक पहाड़िया, महामंत्री प्रकाश सामरिया, जे.के. जैन, उपेंद्र जैन, राजकुमार लुहाड़िया, रविन्द्र जैन, मनोज जैसवाल, संजय निर्वाण, अनिल जैन एवं अरविंद जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। अध्यक्ष अशोक पहाड़िया ने बताया कि महोत्सव का समापन शुक्रवार, 19 जून को श्रुत स्कंध विधान के साथ होगा, जिसमें प्रातः अभिषेक, पूजन, मंगल प्रवचन और सायंकाल आचार्य भक्ति एवं महाआरती के साथ आयोजन पूर्णता को प्राप्त होगा। यह महोत्सव न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का केंद्र बना, बल्कि समुदाय को एकता और आत्मिक उन्नति के सूत्र में पिरोने का एक सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ।

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