राजस्थान की शैक्षणिक नगरी कोटा में निजी बिजली फ्रेंचाइजी कंपनी कोटा इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (केईडीएल) की कार्यप्रणाली और वित्तीय धांधलियों के विरुद्ध राज्य सरकार ने निर्णायक रुख अपना लिया है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के स्पष्ट निर्देशों पर गठित उच्च स्तरीय जांच समिति ने शनिवार को नयापुरा पावर हाउस में विशेष जनसुनवाई शिविर का आयोजन किया, जहाँ उपभोक्ताओं का तीव्र आक्रोश और कंपनी के विरुद्ध भ्रष्टाचार, अवैध वसूली तथा मानसिक उत्पीड़न के साक्ष्यों का अंबार देखने को मिला। राजस्थान ऊर्जा विकास एवं आईटी लिमिटेड के निदेशक (वित्त) डीके जैन की अध्यक्षता वाली इस समिति में आरवीपीएनएल के निदेशक (संचालन), आरयूवीआईटीएल के अधीक्षण अभियंता और जेवीवीएनएल के अधिशाषी अभियंता (IA) जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जो ऊर्जा विभाग के विशेष आदेश के तहत केईडीएल के वित्तीय ढांचे और गतिविधियों की सूक्ष्मता से पड़ताल कर रहे हैं।

जनसुनवाई के दौरान उपभोक्ताओं ने साक्ष्यों के साथ बताया कि बिल जमा होने के उपरांत भी बकाया राशि दिखाई जा रही है और अनावश्यक सरचार्ज व भारी पेनल्टी के माध्यम से आर्थिक शोषण किया जा रहा है। पीएम सूर्यघर योजना की सब्सिडी राशि अटकने, सोलर मीटर के नाम पर रिश्वत की मांग और बिना नोटिस बिजली काटने जैसी गंभीर शिकायतों ने कंपनी की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। उपभोक्ता संजय सहित कई अन्य लोगों ने कर्मचारियों के अभद्र व्यवहार और तकनीकी लापरवाही जैसे कि ट्रांसफार्मर व एलटी लाइन शिफ्टिंग में देरी और बार-बार ट्रिपिंग की समस्याओं को मजबूती से रखा। समिति अध्यक्ष डीके जैन ने इन सभी प्रमाणों को रिकॉर्ड पर लेते हुए आश्वस्त किया कि विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर अनियमितताएं सिद्ध होने पर कंपनी के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

राजनीतिक और व्यापारिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर केईडीएल को घेरा है। भाजपा शहर जिलाध्यक्ष राकेश जैन (मड़िया) ने जांच अधिकारी को सौंपे मांग पत्र में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के '24 घंटे में बिजली कनेक्शन' के संकल्प की अवहेलना का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि कोटा में उपभोक्ताओं को कनेक्शन के लिए माह भर प्रतीक्षा करनी पड़ रही है और पुरानी सब्जी मंडी स्थित एकमात्र कार्यालय पर वर्कलोड कम करने के लिए आवेदन प्रक्रिया को सभी 11 उपखंडों पर विकेंद्रीकृत करने का सुझाव दिया। वहीं, जनरल मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार जैन ने अघोषित कटौती, वोल्टेज की समस्या और तकनीकी फाल्ट के कारण ठप होते व्यापार पर कड़ा रोष व्यक्त किया। व्यापारियों ने कर्मचारियों द्वारा गलत रीडिंग लेने और अभद्र भाषा के प्रयोग को लेकर विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

भ्रष्टाचार के आरोपों को और विस्तार देते हुए जिला पंचायत समिति (लाडपुरा) के सदस्य कुलदीप नागर ने 13 बिंदुओं का एक विस्तृत साक्ष्य पत्र प्रस्तुत किया। नागर ने आरोप लगाया कि सितंबर 2016 से कार्यभार संभालने के बाद केईडीएल ने सरकारी नियमों और तकनीकी मानकों को दरकिनार कर जनता का आर्थिक शोषण किया है। उन्होंने मांगपत्रों की राशि में हेरफेर, पुरानी लाइनों को हटाने में गड़बड़ी और नई लाइनों में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए NABL/CTL रिपोर्ट की मांग की है। साथ ही, जेवीवीएनएल के सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर के उपयोग की वर्तमान स्थिति और 132 केवी जीएसएस व केशोराय पाटन लाइन से जुड़े निर्देशों की अवहेलना पर जवाब मांगा गया है। भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से कोटा को मुक्त कराने की यह मांग अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है, जिसका भविष्य अब जांच समिति की रिपोर्ट पर टिका है।

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