कोटा में 25 जून के प्रदर्शन को लेकर गरमाई राजनीति, केडीए और वन विभाग की कथित ज्यादतियों के खिलाफ हजारों ग्रामीणों के जुटने का दावा
कोटा में 25 जून को केडीए कार्यालय पर होने वाले बड़े प्रदर्शन से पहले माहौल गरमाया, ग्रामीणों पर कथित ज्यादतियों और वन विभाग की कार्रवाई के विरोध में हजारों लोगों के जुटने का दावा, राजनीतिक हलचल तेज।

कोटा में पत्रकार वार्ता के दौरान मंच पर (बाएं से दाएं) रामलाल गुंजल, एक कार्यकर्ता, पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल, मन्ना लाल गुर्जर और अन्य उपस्थित रहे।
कोटा में 25 जून को केडीए, वन विभाग और पुलिस की कथित ज्यादतियों के खिलाफ प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। राजस्थान गुर्जर महासभा और हाड़ौती गुर्जर महासभा ने प्रेस वार्ता कर दावा किया है कि इस प्रदर्शन में कोटा, बूंदी सहित आसपास के सैकड़ों गांवों से हजारों की संख्या में ग्रामीण शामिल होंगे।
सीएडी क्षेत्र स्थित केडीए कार्यालय पर होने वाले इस विरोध प्रदर्शन को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने प्रशासन और सरकार पर ग्रामीणों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप लगाए। नेताओं ने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से कथित कार्रवाई और दबाव के कारण भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने कहा कि केडीए और वन विभाग की कार्रवाइयों के चलते ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हो रहा है और लोग लगातार भय के वातावरण में जी रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन गांवों में पीढ़ियों से लोग निवास कर रहे हैं, वहां अब उनके अस्तित्व पर संकट खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पशुधन और आजीविका पर रोक जैसे हालात ग्रामीण जीवन को प्रभावित कर रहे हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था का उद्देश्य भय पैदा करना नहीं बल्कि सुरक्षा देना है।
पूर्व प्रधान मन्ना लाल गुर्जर ने कहा कि ग्रामीण अब कथित अत्याचार सहन नहीं कर पा रहे हैं और उनमें भारी आक्रोश है। उन्होंने दावा किया कि कोटा-बूंदी क्षेत्र के सैकड़ों गांवों के लोग स्वयं इस प्रदर्शन में शामिल होंगे। वहीं पूर्व सरपंच रामलाल गुंजल ने सवाल उठाया कि जब शहरों में वर्षों पुराने कब्जों को नियमित किया जा रहा है, तो गांवों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में भी नियमितीकरण की मांग की।
पूर्व सरपंच बोराबास गोविंद भड़क ने कहा कि सर्व समाज सहित गुर्जर, मीणा, बंजारा और आदिवासी समुदाय के लोग बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने दावा किया कि आजादी से पहले बसे गांवों की भूमि को वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में लेने को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है।
प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि इस प्रदर्शन में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर, खानपुर विधायक सुरेश गुर्जर सहित कई नेता भी शामिल होंगे। कार्यक्रम में राजस्थान गुर्जर महासभा अध्यक्ष रामलाल गुंजल, हाड़ौती गुर्जर महासभा अध्यक्ष डॉ. बी.एल. गोचर, पूर्व पंचायत समिति सदस्य कल्याण गुर्जर, पूर्व अध्यक्ष राजेश बोड, लोकेश गुंजल, पूर्व पार्षद धनराज चेची, विकास तंवर, लक्ष्मण बजाड़, श्रवण गुर्जर सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
25 जून को प्रस्तावित यह प्रदर्शन अब क्षेत्र में व्यापक राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है, जहां ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी के दावे के साथ प्रशासन और सरकार की नीतियों पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

Pratahkal Bureau
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