कोटा से कामाख्या माता सिंदूर अर्पण यात्रा 19 जून से, पीओके पर होगी विशेष प्रार्थना
बूढ़ गेपरनाथ महादेव सेवा समिति की यात्रा के पोस्टर का लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया विमोचन, पाक अधिकृत कश्मीर को भारत में मिलाने की की जाएगी कामना।

राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत 'द्वितीय सिंदूर अर्पण यात्रा' का आगामी 19 जून को भव्य शुभारंभ होने जा रहा है। बूढ़ गेपरनाथ महादेव सेवा समिति, कोटा के तत्वावधान में आयोजित होने वाली इस राष्ट्रव्यापी और धार्मिक यात्रा के पोस्टर का विमोचन गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा किया गया। इस गरिमामयी अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ने समिति के इस अनूठे एवं देशभक्तिपूर्ण प्रयास की हृदय से सराहना की तथा यात्रा की संपूर्ण सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। पोस्टर विमोचन के दौरान समिति के तमाम प्रमुख पदाधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने यात्रा के विस्तृत मार्ग, सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्थाओं की रूपरेखा साझा की।
समिति के उपाध्यक्ष लीलाधर मेहता ने यात्रा के संदर्भ में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह भव्य यात्रा देश की शिक्षा नगरी कोटा से 19 जून को प्रारंभ होगी और विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए 30 जून को असम स्थित विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां कामाख्या माता मंदिर पहुंचेगी। इस विशेष यात्रा का मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिक और राष्ट्रीय है, जिसके तहत माता कामाख्या के चरणों में शीश नवाकर 'पाक अधिकृत कश्मीर' (पीओके) को पुनः भारत का अभिन्न हिस्सा बनाने की विशेष मनोकामना की जाएगी। इसके साथ ही देश की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा की मंगल कामना के साथ समिति के समस्त सदस्यों द्वारा कामाख्या माता को पूरी श्रद्धा के साथ सिंदूर अर्पित किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष 'ऑपरेशन सिन्दूर' की पृष्ठभूमि में भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और बलिदान को नमन करते हुए इस सिन्दूर अर्पण यात्रा की शुरुआत की गई थी। उस प्रथम यात्रा के दौरान माता कामाख्या को सिंदूर अर्पित करने के साथ-साथ सोने की नथ भी श्रद्धापूर्वक भेंट की गई थी। लीलाधर मेहता ने बताया कि इस वर्ष भी यात्रा के सुचारू और सफल संचालन के लिए समिति के सचिव रामू खारवाल, कोषाध्यक्ष हरिनारायण दीक्षित और कामाख्या यात्री रामू सेन सहित पूरी टीम पूरी निष्ठा के साथ जुटी हुई है। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि देशवासियों में देशभक्ति की अलख जगाने और भारत की सीमाओं की सुरक्षा के लिए दैवीय आशीर्वाद प्राप्त करने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावकारी राष्ट्रव्यापी अनुष्ठान बन चुकी है।

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