अखंड भारत का संकल्प: कोटा से कामाख्या के लिए रवाना हुई द्वितीय 'सिंदूर अर्पण यात्रा'
कोटा से कामाख्या तक की 3000 किमी लंबी यात्रा का अनूठा सफर शुरू। पाक अधिकृत कश्मीर की भारत में वापसी के संकल्प और माँ कामाख्या को सोने की नथ अर्पित करने की इस पावन यात्रा में छिपे हैं अखंड भारत के सपने। जानिए इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन की पूरी खबर।

कोटा से गुवाहाटी के लिए रवाना हुई द्वितीय सिंदूर अर्पण यात्रा के सदस्य, जो माँ कामाख्या मंदिर में अखंड भारत के लिए विशेष प्रार्थना करेंगे।
कोटा से राष्ट्रप्रेम और आध्यात्मिक आस्था का एक अद्भुत संगम शुक्रवार को उस समय देखने को मिला, जब 'द्वितीय सिंदूर अर्पण यात्रा' का भव्य शुभारंभ हुआ। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य माँ कामाख्या के चरणों में शीश नवाकर अखंड भारत के सपने को साकार करना और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) की भारत में वापसी के लिए विशेष प्रार्थना करना है। बूढ़ गेपरनाथ महादेव सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित यह यात्रा कोटा रेलवे स्टेशन से गुवाहाटी के लिए रवाना हुई, जहाँ से यह देश के एक छोर से दूसरे छोर तक राष्ट्रभक्ति का संदेश लेकर आगे बढ़ रही है।
यात्रा का विधिवत शुभारंभ पुष्टिमार्गीय प्रथमीश पीठ श्री बड़े मथुराधीश प्रभु के दर्शन और आशीर्वाद के साथ हुआ। इसके बाद तीर्थयात्री कोटा स्टेशन पहुंचे, जहां भारतीय किसान संघ के प्रांतीय प्रवक्ता आशीष मेहता ने जनशताब्दी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। स्टेशन का पूरा परिसर उस समय गूंज उठा जब श्रद्धालुओं ने 'भारत माता की जय' और 'माँ कामाख्या' के उद्घोष किए। यह यात्रा लगभग 3000 किलोमीटर की दूरी तय कर आगामी 30 जून को असम की राजधानी गुवाहाटी स्थित विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ कामाख्या मंदिर पहुंचेगी।
समिति के उपाध्यक्ष लीलाधर मेहता ने इस यात्रा के मूल उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस वर्ष का मुख्य संकल्प देशहित से जुड़ा है। तीर्थयात्री माँ कामाख्या को विशेष रूप से तैयार करवाई गई सोने की नथ और सिंदूर अर्पित करेंगे। इस अनुष्ठान के साथ ही वे पाक अधिकृत कश्मीर को पुनः भारत का अभिन्न अंग बनाने की प्रार्थना करेंगे, ताकि अखंड भारत का स्वप्न पूर्ण हो सके। समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, यह यात्रा न केवल धार्मिक है, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण और संकल्प की एक अनूठी अभिव्यक्ति है।
इस अनूठी पहल की शुरुआत गत वर्ष भारतीय सेना के अदम्य साहस और शौर्य के सम्मान में 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत की गई थी। उस समय सेना के पराक्रम के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना ही इसका मुख्य ध्येय था। इस वर्ष भी उसी भावना को जीवंत रखते हुए समिति ने इस यात्रा को निरंतरता प्रदान की है। यात्रा के सुचारू संचालन और सभी व्यवस्थाओं के प्रबंधन के लिए समिति के सचिव रामू खारवाल, कोषाध्यक्ष हरिनारायण दीक्षित तथा यात्री रामू सेन पूरी जिम्मेदारी के साथ दल का नेतृत्व कर रहे हैं। माँ कामाख्या के दरबार में अर्पित की जाने वाली यह प्रार्थना और समर्पण का भाव राष्ट्र की अखंडता के प्रति जनमानस की अटूट आस्था को प्रदर्शित करता है।

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