अथर्वा आदित्य सेवा संस्थान कोटा द्वारा भारतीय प्राच्य विद्याओं के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से आगामी 8 एवं 9 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष, वास्तु एवं आयुर्वेद महासम्मेलन एवं वरिष्ठ नागरिक सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा। दो दिवसीय यह आयोजन गीता सत्संग आश्रम गीता भवन में आयोजित होगा, जिसमें देश-विदेश से आने वाले विद्वानों का समागम कोटा में होगा।

संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष आदित्य कुमार शास्त्री ने बताया कि अथर्वा आदित्य सेवा संस्थान विगत कई वर्षों से भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा एवं प्राचीन ज्ञान-विज्ञान के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। अथर्ववेद के अंगों के रूप में ज्योतिष, वास्तु, आयुर्वेद, धर्म, आध्यात्म, योग एवं भारतीय जीवन दर्शन को जन-जन तक पहुंचाना संस्थान का प्रमुख उद्देश्य है। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए यह अंतरराष्ट्रीय महासम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश के साथ विदेशों से भी विद्वान भाग लेंगे।

प्रवक्ता गीतिका शर्मा एवं महेंद्र पांडे ने बताया कि सम्मेलन में भारत के लगभग सभी राज्यों से प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य, वास्तु विशेषज्ञ, तंत्र-मंत्र साधक, हस्तरेखा विशेषज्ञ, अंगूठा विद्या के ज्ञाता, टैरो कार्ड रीडर, रेकी हीलर, योगाचार्य, आयुर्वेदाचार्य, शोधकर्ता, आध्यात्मिक चिंतक तथा विभिन्न प्राच्य विद्याओं के विशेषज्ञ शामिल होंगे। नेपाल सहित अन्य देशों से भी विद्वानों के आने की पुष्टि हो चुकी है। आयोजन में लगभग 200 से अधिक विद्वानों का संगम कोटा की धरती पर होगा।

आयोजन समिति सदस्य आरती शर्मा एवं ज्योतिष पूरन सोनी ने बताया कि सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में ज्योतिष के गूढ़ रहस्यों, ग्रह-नक्षत्रों के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक प्रभाव, वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के महत्व, आयुर्वेद की उपयोगिता, योग एवं ध्यान की आवश्यकता तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण जैसे विषयों पर विद्वानों द्वारा शोधपत्र एवं व्याख्यान प्रस्तुत किए जाएंगे।

सम्मेलन में जिज्ञासुओं को अपने प्रश्न पूछने एवं विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर भी मिलेगा। संस्थान का मानना है कि वर्तमान समय में आधुनिक जीवनशैली के कारण लोग मानसिक तनाव, पारिवारिक समस्याओं, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों एवं जीवन में असंतुलन का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में भारतीय प्राचीन ज्ञान-विज्ञान मानव जीवन को नई दिशा देने में सक्षम है। ज्योतिष व्यक्ति के जीवन को समझने और उचित मार्गदर्शन प्रदान करने का माध्यम है, वास्तु सकारात्मक ऊर्जा का विज्ञान है, जबकि आयुर्वेद स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का आधार है। इन सभी विषयों की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उपयोगिता पर सम्मेलन में चर्चा की जाएगी।

कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान किया जाएगा। इसके साथ ही शिक्षा, चिकित्सा, समाजसेवा, प्रशासन, संस्कृति, साहित्य, अध्यात्म एवं अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले विशिष्ट व्यक्तित्वों को भी सम्मानित किया जाएगा। संस्थान का उद्देश्य समाज में सेवा, संस्कार और सम्मान की भावना को मजबूत करना है।

संस्थान की कोषाध्यक्ष खुशबू दाधीच ने बताया कि इस आयोजन में देश के अनेक ख्यातिप्राप्त एवं विश्वविख्यात विद्वान अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। इनमें प्रमुख रूप से पं. अनिल वत्स, दिल्ली, डॉ. अजय भाम्बी (दिल्ली), डॉ. अरुण बंसल (दिल्ली), घनश्याम आचार्य गौतम, एन. के. भट्ट, डॉ. दीपक मीनेश, पं. आचार्य जगदीश (जयपुर), गौतम कृपाराम उपाध्याय (भोपाल), आर. दाधीच (पाली), नरेश दाधीच भीलवाड़ा, भेरू प्रकर दाधीच जोधपुर, पं. प्रदीप जोशी, राज कुमार त्रिपाठी अयोध्या, आचार्य भुवनेश गौतम, हेमंत श्रीवास्तव अंगूठा विद्याके अशोक नगर, एड मुकेश शर्मा इंदौर, तत्वज्ञ कुमार प्रवीण दिल्ली, मोहन लाल अग्रहरि पंचांगुली उपासक, डॉ. दिवाकरण कट्टु केरल, डॉ. सिद्धेश्वर सिंह (पटना), अशोक रूपवते (पुणे), डॉ. हितेंद्र भोजने (इंदौर), आचार्य भुवनेश गौतम, डॉ. विजय कुमार वानी (पुणे, पूर्व चीफ इंजीनियर सैनिक अभियंता सेवा), राजकुमार खंडेलवाल (पंचवटी), केतन खरे (महाराष्ट्र), डॉ. रामप्रसाद शास्त्री (इटावा) तथा नाथूलाल सेठिया (देवास) सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विद्वान भाग लेंगे।

नेपाल सहित अन्य देशों के विद्वानों की उपस्थिति आयोजन को वैश्विक स्वरूप प्रदान करेगी। संस्थान का विश्वास है कि यह महासम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना एवं प्राचीन ज्ञान-विज्ञान के पुनर्जागरण का महत्वपूर्ण अभियान सिद्ध होगा। इससे युवाओं में भारतीय परंपरा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी तथा समाज को सकारात्मक दिशा मिलेगी।

अथर्व आदित्य सेवा संस्थान ने कोटा एवं आसपास के सभी नागरिकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, ज्योतिष एवं वास्तु में रुचि रखने वाले लोगों, सामाजिक संगठनों तथा धर्मप्रेमियों से आग्रह किया है कि वे इस दो दिवसीय महासम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर विद्वानों के व्याख्यानों का लाभ प्राप्त करें और भारतीय ज्ञान परंपरा के इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बनें। संस्थान के अनुसार यह आयोजन कोटा की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Pratahkal Hub

Pratahkal Hub

प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"

Next Story