कोटा: चेतना जांगिड़ बनीं गणगौर क्वीन, जांगिड़ समाज ने मनाया गणगौर महोत्सव
सुभाष नगर स्थित जांगिड़ छात्रावास में आयोजित सांस्कृतिक प्रतियोगिता में मीनाक्षी जांगिड़ को महारानी का खिताब मिला, महिलाओं ने सामूहिक घूमर नृत्य से बिखेरी छटा।

कोटा। अखिल भारतीय जांगिड़ ब्राह्मण महासभा महिला प्रकोष्ठ, कोटा के तत्वावधान में सोमवार को सुभाष नगर स्थित जांगिड़ ब्राह्मण समाज छात्रावास में गणगौर महोत्सव का भव्य और हर्षोल्लासपूर्ण आयोजन संपन्न हुआ। पारंपरिक लोक संस्कृति और आधुनिक उत्साह के इस संगम में समाज की महिलाओं एवं युवतियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर समां बांध दिया। कार्यक्रम के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में चेतना जांगिड़ ने अपनी गरिमा और कौशल के बल पर 'गणगौर क्वीन' का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया।
महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष पारस शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस समारोह में प्रदेश अध्यक्ष रेणु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जबकि समाज सेविका गीता शर्मा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उषा और ललिता की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। महोत्सव का मुख्य आकर्षण सामूहिक घूमर नृत्य प्रतियोगिता रही, जिसमें राजस्थानी संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली। प्रतियोगिताओं के कड़े मुकाबले में 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 'महारानी' का खिताब मीनाक्षी जांगिड़ को प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त हाउजी सहित अन्य मनोरंजक गतिविधियों में भी महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जहाँ विभिन्न आयु वर्ग की प्रतिभागियों को उनकी प्रतिभा के आधार पर सम्मानित किया गया।
जिलाध्यक्ष पारस शर्मा ने आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस महोत्सव का मूल ध्येय समाज की महिलाओं को एक सशक्त मंच प्रदान करना, उनकी सुप्त प्रतिभा को प्रोत्साहित करना और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को भावी पीढ़ी तक पहुँचाना है। उन्होंने बताया कि संस्था निरंतर आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में सक्रिय रहकर समाज के उत्थान हेतु कार्य कर रही है। कार्यक्रम की सफलता में कार्यकारिणी सदस्य शांति शर्मा, चंद्रेश रावत, शिखा, सोनू शर्मा, विमला, गंगा, अंजू, रेखा, अदिति, योगिता, कमलेश, ममता जांगिड़, ममता शर्मा, अंजलि, स्नेहलता, कुसुम, चंदा, उर्मिला, कल्पना और ज्योति सहित बड़ी संख्या में उपस्थित मातृशक्ति का विशेष योगदान रहा। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।

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