कोटा के जैन मंदिर में ध्यान-योग शिविर शुरू, आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने दिया प्रवचन
कुन्हाड़ी के श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में आध्यात्मिक चिकित्सा शिविर का आयोजन, माताजी ने कहा- जीवन में संघर्ष ही व्यक्तित्व को निखारते हैं।

कोटा के कुन्हाड़ी स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित ध्यान-योग शिविर के दौरान धर्मसभा के मंच पर श्रद्धालुओं को संबोधित करतीं आर्यिका रत्न 105 श्री स्वस्ति भूषण माताजी।
परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्या भूषण सन्मति सागर जी महाराज की परम शिष्या एवं भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न 105 श्री स्वस्ति भूषण माताजी (ससंघ) के पावन सान्निध्य में कोटा के कुन्हाड़ी स्थित रिद्धि-सिद्धि नगर के श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में ध्यान-योग एवं आध्यात्मिक चिकित्सा शिविर का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर वर्तमान में श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक जागरण और स्वास्थ्य संवर्धन का एक अत्यंत प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है, जो जनमानस को आत्मिक शांति की ओर अग्रसर कर रहा है।
शिविर के दौरान आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ने जीवन के गूढ़ रहस्यों को उजागर किया। उन्होंने अपने ओजस्वी प्रवचन में कहा कि भगवान राम और भगवान कृष्ण के जीवन में भी अनेक संघर्ष आए, लेकिन उन्होंने इन भीषण चुनौतियों का सामना कभी रोकर नहीं, बल्कि सदैव मुस्कुराते हुए किया। माताजी ने बल देकर कहा कि संघर्ष ही मनुष्य के व्यक्तित्व को निखारते हैं और उसके जीवन को महानता की ओर ले जाते हैं। संघर्षों के थपेड़ों से मनुष्य की बुद्धि तीव्र और कुशाग्र होती है, जबकि इसके विपरीत अत्यधिक सुविधाएं मनुष्य को भीतर से कमजोर और पंगु बना देती हैं। उन्होंने विशेष रूप से सचेत करते हुए कहा कि बच्चों को आवश्यकता से अधिक सुविधाएं मिलने पर उनकी निर्णय क्षमता और मानसिक दृढ़ता बुरी तरह प्रभावित होती है।
आध्यात्मिक गहराई के साथ अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि संघर्ष वह पवित्र अग्नि है, जिसमें तपकर एक साधारण मनुष्य भी महानता के सर्वोच्च शिखर तक पहुंच सकता है। जीवन के चक्र में सुख और दुख दोनों का आना सुनिश्चित है, किंतु इसमें अंतर केवल मनुष्य के दृष्टिकोण का होता है। जहां कुछ लोग दुखों को रोकर भोगते हैं, वहीं कुछ साहसी लोग उन्हें हंसते हुए स्वीकार कर जीवन पथ पर आगे बढ़ते हैं।
संस्थानिक एवं प्रबंधन के स्तर पर मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि इस शिविर में राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त योगाचार्य नवीन भैया जी (जबलपुर) विशेष रूप से साधकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उनके निर्देशन में प्रतिदिन प्रातः 7:15 से 8:15 बजे तक विशेष ध्यान एवं योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, सायंकालीन सत्रों में भी साधकों को योग, ध्यान एवं आध्यात्मिक जीवनशैली का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। योगाचार्य नवीन भैया अपनी सरल, सहज एवं प्रभावी शैली के माध्यम से सभी आयु वर्ग के प्रतिभागियों को योग, ध्यान, मानसिक स्वास्थ्य एवं सकारात्मक जीवन दृष्टि के विविध आयामों से निरंतर परिचित करा रहे हैं।
इस गरिमामय एवं ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन के सुअवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज के महामंत्री पदम बडला, मनोज जासवाल, विनोद तोरड़ी, पंकज खटोड़, राजू गोधा, पारस कासलीवाल, पारस लुहाड़िया, तारा चाँद बड़ला तथा अनिल ठोरा सहित समाज के कई प्रतिष्ठित पदाधिकारी एवं प्रबुद्ध सदस्य प्रमुखता से उपस्थित रहे। यह शिविर न केवल आध्यात्मिक चेतना को जागृत कर रहा है, बल्कि समाज में सकारात्मकता और मानसिक सुदृढ़ता का संचार कर एक गहरे सामाजिक व स्वास्थ्य संवर्धक प्रभाव को रेखांकित कर रहा है।

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