कोटा: जैन सोशल ग्रुप अनुभव ने महावीर जयंती पर 128 दिव्यांगों को बांटे कृत्रिम अंग
महावीर जयंती पर आयोजित निःशुल्क शिविर में कोटा संभाग के दिव्यांगों को जयपुर फुट, कैलिपर्स और ट्राईसाईकिल प्रदान कर शारीरिक संबल दिया गया।

कोटा। अहिंसा के अवतार 1008 भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक महोत्सव के पावन अवसर पर दिगंबर जैन सोशल ग्रुप 'अनुभव' ने सेवा और करुणा की एक भव्य मिसाल पेश की है। सोमवार प्रातः 9 बजे कोटा के दशहरा मैदान में ग्रुप के तत्वाधान में एक विशाल निःशुल्क दिव्यांग शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया, जिसमें कुल 128 दिव्यांगजन लाभान्वित हुए।
अध्यक्ष अशोक जोरा ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह पुनीत कार्य भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति के सक्रिय सहयोग से संपन्न हुआ। सचिव विमल कुमार जैन ने रेखांकित किया कि इस शिविर के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया केवल कोटा संभाग तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से आए दिव्यांगों ने भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शिविर की सफलता में महावीर विकलांग सेवा समिति की तकनीकी और मानवीय सहायता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समिति के प्रतिनिधि प्रवीण भंडारी ने वितरण के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए जानकारी दी कि शिविर के माध्यम से 35 लाभार्थियों को जयपुर फुट, 61 को कैलिपर्स, 3 को व्हीलचेयर, 3 को ट्राईसाईकिल, 1 को कृत्रिम हाथ तथा 15 दिव्यांगों को बैसाखी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, 10 सेरेब्रल पाल्सी किट का भी वितरण किया गया। फेडरेशन के राष्ट्रीय अतिरिक्त महासचिव जे. के. जैन ने मानवीय दृष्टिकोण साझा करते हुए बताया कि मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें विशेष प्रकार की 10 ट्राईसाईकिलें भी भेंट की गईं।
अध्यक्ष अशोक जोरा ने सफल क्रियान्वयन का श्रेय करणी विकास समिति के चेयरपर्सन इंजीनियर प्रवीण कुमार भंडारी, लालचंद जैन, सत्येंद्र जैन, पवन सेठी, राजमल पाटौदी और पी. सी. गोधा के अथक सहयोग को दिया। इस गरिमामयी सेवा प्रकल्प के दौरान ग्रुप के धर्मचंद काला, जे. के. जैन, कोषाध्यक्ष इंजीनियर प्रकाश जैन, एस. के. दोसी, सुरेंद्र कुमार जैन, महेंद्र जैन, शरद पाटनी, सुरेश पाटौदी, अनिल जैन, महेंद्र जैन (द्वितीय), नवीन जैन और चांदमल जैन सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। भगवान महावीर के सिद्धांतों को धरातल पर उतारते हुए इस शिविर ने न केवल दिव्यांगों को शारीरिक संबल प्रदान किया, बल्कि समाज में संवेदनशीलता का एक सशक्त संदेश भी संप्रेषित किया।

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