कोटा: जैन धरोहर दिवस पर प्राचीन मंदिरों के संरक्षण का संकल्प
श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा द्वारा विज्ञान नगर में जैन धरोहर दिवस आयोजित, प्राचीन मूर्तियों के संरक्षण हेतु समाज ने जताई एकजुटता।

कोटा के विज्ञान नगर स्थित जैन मंदिर में जैन धरोहर दिवस के अवसर पर चित्र अनावरण और दीप प्रज्वलन करते महासभा के पदाधिकारी एवं गणमान्य सदस्य।
कोटा में प्राचीन जैन तीर्थों, मंदिरों और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर समाज की सशक्त एकजुटता देखने को मिली, जब श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा, हाड़ौती संभाग के तत्वावधान में 27 अप्रैल को विज्ञान नगर स्थित जैन मंदिर में जैन धरोहर दिवस श्रद्धा, जागरूकता और संकल्प के वातावरण में आयोजित किया गया।
संरक्षक राजमल पाटौदी ने जानकारी दी कि कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 9 बजे मंगलाचरण के साथ हुआ। इस अवसर पर मंदिर एवं मूर्ति संरक्षण के लिए राजकुमार चांदवाड़, ईश्वर सोनी और निखलेश सेठी द्वारा आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन पी.के. हरसोरा ने किया।
स्वागत भाषण में पुरातत्व संयोजक जे.के. जैन ने महासभा के 125 वर्षों के निरंतर संरक्षण कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि देवली क्षेत्र में जिन बिम्बों के संरक्षण हेतु महासभा और समाज ने संयुक्त प्रयास किए हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष देशभर में 600 स्थानों पर जैन धरोहर दिवस मनाया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान पूर्व अध्यक्ष निर्मल कुमार सेठी को विनम्र विन्याजलि अर्पित की गई।
परम संरक्षक विमल जैन नांता ने समाज की एकजुटता को आवश्यक बताते हुए मंदिरों और मूर्तियों के संरक्षण में सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। सकल दिगम्बर जैन समाज के महामंत्री पदम बड़ला ने कहा कि “जैन मंदिरों की सुरक्षा ही समाज की सुरक्षा है,” और इसे समाज का पवित्र दायित्व बताया। निखलेश सेठी ने सुझाव दिया कि 18 मई, अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर कोटा संग्रहालय में संरक्षित प्राचीन मूर्तियों को समाज के समक्ष प्रदर्शित किया जाए और उनकी जानकारी दी जाए।
मुख्य वक्ता आर.के. जैन ने बिलासगढ़, अटरू और शेरगढ़ क्षेत्रों में स्थित हजारों वर्ष प्राचीन मूर्तियों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2025 में इन्हें पुरातत्व विभाग के संरक्षण में लिया गया है। महासभा अध्यक्ष नरेश पांड्य और महामंत्री राकेश चपलमन ने बताया कि कार्यक्रम में श्री आदिनाथ जैन मंदिर, बालिता द्वारा शेरगढ़ से प्राप्त अतिप्राचीन मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा विराजित करने पर सम्मान किया गया। साथ ही श्री पंचायत बघेरवाल महावीरजी नेमीश्वर, टिपटा गढ़ पैलेस को प्राचीनता के बावजूद नियमित पूजन-अर्चन बनाए रखने के लिए सम्मानित किया गया।
संरक्षक राजमल पाटौदी ने अपने संबोधन में कहा कि महासभा की यह शाखा लंबे समय से प्राचीन जैन तीर्थों, मंदिरों, मूर्तियों और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण, सर्वेक्षण, जीर्णोद्धार और संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभा रही है, जिससे आने वाली पीढ़ियां इस समृद्ध धार्मिक विरासत से लाभान्वित हो सकें।
कार्यक्रम में चित्र अनावरण का सौभाग्य श्रवण कुमार बड़जात्या को प्राप्त हुआ, जबकि दीप प्रज्वलन संजय पांड्या द्वारा किया गया। इस अवसर पर संरक्षक राजमल पाटौदी, पुरातत्व संयोजक जे.के. जैन, महासभा अध्यक्ष नरेश पांड्य, महामंत्री राकेश चपलमन, कार्याध्यक्ष राजेन्द्र गोधा, कोषाध्यक्ष जीवंधर सोगानी, मनोज जैसवाल, सुरेश हरसोरा, तारा चंद बड़ला, जिनेंद्र जैन (जज साहब), पंकज सेठी, अशोक पहाडिया सहित सकल दिगम्बर जैन समाज के अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।
यह आयोजन न केवल प्राचीन जैन धरोहरों के संरक्षण के प्रति समाज की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के सामूहिक संकल्प को भी मजबूत करता है।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
