कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के अंतर्गत गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ससंघ के चातुर्मासिक प्रवास के दौरान धर्मसभा आयोजित हुई। धर्मसभा में प्रवर्तक मुनि श्री 108 विश्वनायक सागर जी महाराज ने मौन साधना और वाणी के संयम को जीवन की श्रेष्ठता से जोड़ते हुए हितकारी, मित और प्रिय वाणी के प्रयोग का संदेश दिया।

मुनि श्री विश्वनायक सागर जी महाराज ने कहा कि जीवन में मौन साधना और वाणी का संयम अत्यंत महत्वपूर्ण है। मनुष्य को सदैव हितकारी, मित और प्रिय वाणी का प्रयोग करना चाहिए। शब्दों का सदुपयोग व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारने के साथ समाज में प्रेम और सद्भाव बढ़ाता है।

उन्होंने कहा कि तीर्थंकर भगवान भी केवलज्ञान प्राप्त होने तक मौन साधना में रहते हैं। सर्वज्ञ ज्ञान प्राप्त होने के बाद ही उनकी दिव्यध्वनि खिरती है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि अधूरे ज्ञान में मौन रहना ही उचित है। ‘अधजल गगरी छलकत जाए’ कहावत के माध्यम से उन्होंने समझाया कि कम ज्ञान वाला व्यक्ति अधिक बोलता है, जबकि ज्ञानी व्यक्ति आवश्यकता होने पर ही बोलता है। बिना पूछे दो व्यक्तियों के बीच बोलने वाले को मूर्ख कहा जाता है।

मुनि श्री ने भगवान श्रीराम के व्यवहार का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका आचरण इतना श्रेष्ठ था कि पूरी अयोध्या उनके साथ वन जाने के लिए तैयार थी। उन्होंने गोपालदास बरैया द्वारा रचित ‘सिद्धांत प्रवेशिका’ का उल्लेख करते हुए कहा कि एक शब्द औषधि का कार्य कर सकता है। इसलिए हमारी वाणी हितकारी, मित और प्रिय होनी चाहिए। हितकारी शब्दों के माध्यम से हम पूरे संसार को अपना बना सकते हैं।

मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा व मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि धर्मसभा में चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं पाद प्रक्षालन का सौभाग्य देवकुमार, जयकुमार एवं मनीष कुमार शाह परिवार, कमला उद्यान वालों ने प्राप्त किया।

इस अवसर पर सकल समाज अध्यक्ष प्रकाश बज, पदम बडला, संरक्षक विमल नांता, विनोद टोरड़ी, कार्याध्यक्ष मनोज जैसवाल, जैनेन्द्र जज सा., धर्मजी जैन सीए, ताराचंद बडला, युवा प्रकोष्ठ संयोजक पारस बज आदित्य, इंदर पाटनी, टीकम पाटनी, आर.के. पटौदी, पारस कासलीवाल, पारस लुहाड़िया सहित सकल समाज के सदस्य उपस्थित रहे।

धर्मसभा में मुनि श्री विश्वनायक सागर जी महाराज ने मौन साधना, अधूरे ज्ञान में संयम और हित-मित-प्रिय वाणी के महत्व पर जोर दिया। उनके संदेश में वाणी के सदुपयोग को व्यक्ति के व्यक्तित्व और सामाजिक प्रेम-सद्भाव से जोड़ा गया।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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