जैन दर्शन शिविर में गूंज रहे संस्कारों के स्वर, 500 से अधिक शिविरार्थी धर्म और व्यक्तित्व विकास की साधना में जुटे
कोटा में आयोजित जैन दर्शन एवं व्यक्तित्व विकास शिविर में 500 से अधिक शिविरार्थी धर्म, संस्कार और जीवन मूल्यों का प्रशिक्षण ले रहे हैं। चार केंद्रों पर चल रहा यह आयोजन युवा पीढ़ी को नई दिशा दे रहा है।

कोटा के रामपुरा स्थित दिगंबर जैन पोरवाल मंदिर में आयोजित आठ दिवसीय जैन दर्शन एवं व्यक्तित्व विकास शिविर के चौथे दिन बच्चों को धार्मिक संस्कारों और नैतिक मूल्यों की जानकारी देते विद्वान।
धर्म, संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण के समन्वय का एक प्रेरक दृश्य इन दिनों कोटा में देखने को मिल रहा है, जहां श्री दिगंबर जैन बाल विकास पारमार्थिक न्यास के तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय ‘जैन दर्शन एवं व्यक्तित्व विकास शिविर’ में सैकड़ों शिविरार्थी उत्साहपूर्वक सहभागिता कर रहे हैं। शिविर के चौथे दिन भी चारों केंद्रों पर बच्चों, युवाओं, महिलाओं और प्रौढ़ों की सक्रिय उपस्थिति ने आयोजन को विशेष ऊर्जा प्रदान की।
यह शिविर 21 जून तक रामपुरा स्थित दिगंबर जैन पोरवाल मंदिर, इंद्राविहार स्थित सिमंधर जिनालय, सिलिकॉन सिटी तथा स्वर्ण मंदिर बोरखेड़ा में संचालित किया जा रहा है। शिविर में 500 से अधिक प्रतिभागी जैन धर्म के सिद्धांतों, आध्यात्मिक मूल्यों और व्यक्तित्व विकास के विविध आयामों का अध्ययन कर उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करने का प्रयास कर रहे हैं।
शिविर संयोजक जिनेन्द्र दुगैरिया, पं. अभिलाष शास्त्री, उत्तम पोरवाल एवं भानु हरसोरा ने बताया कि आयोजन में विभिन्न आयु वर्गों के लिए अलग-अलग प्रशिक्षण सत्र संचालित किए जा रहे हैं। समापन से पूर्व सभी प्रतिभागियों के लिए आयु वर्ग के अनुसार परीक्षाओं का आयोजन होगा तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित किया जाएगा।
न्यास के अध्यक्ष विजय जैन एवं मंत्री सीए संजय जैन के अनुसार शिविर में शिशु, बाल, किशोर, युवा और प्रौढ़ वर्ग के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए शिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। रामपुरा केंद्र पर पं. आदित्य शास्त्री ने बच्चों को खेल-खेल में जीव और कर्म के संबंध को सरल एवं रोचक तरीके से समझाया। वहीं इंदौर से आए पं. मनीष शास्त्री ने कर्म के भेद-प्रभेद पर विस्तार से प्रकाश डाला, जबकि आरोन के पं. अमन शास्त्री ने ‘निमित्त-उपादान’ विषय पर सारगर्भित प्रवचन प्रस्तुत किए।
इंद्राविहार स्थित सिमंधर जिनालय में आगम शास्त्री और आर्जव शास्त्री जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों के साथ-साथ व्यवहारिक जीवन में नैतिक मूल्यों की भूमिका पर मार्गदर्शन दे रहे हैं। शिविर के दौरान बच्चों को जैन पूजा-पद्धति, धार्मिक आचार-विचार, संस्कारों और सांस्कृतिक परंपराओं की भी विस्तृत जानकारी प्रदान की जा रही है।
प्रचार-प्रसार समिति के यतीन्द्र जैन ने बताया कि शिविर का उद्देश्य जैन धर्म के सिद्धांतों का व्यापक प्रचार-प्रसार करना तथा युवा पीढ़ी में नैतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों का संवर्धन करना है। इस आयोजन में राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से आए विद्वानों के साथ-साथ कोटा के लगभग 15 स्थानीय विद्वान भी विभिन्न वर्गों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।
शिविर के दैनिक कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिदिन प्रातः 7 बजे से जैन दर्शन सत्र, अभिषेक और पूजन का आयोजन किया जाता है। इसके बाद विभिन्न आयु वर्गों के लिए शिक्षण कक्षाएं, प्रवचन, सामूहिक सत्र और सायंकालीन भक्ति कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को धर्म, संस्कार और जीवन मूल्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
21 जून को रामपुरा स्थित दिगंबर जैन पोरवाल मंदिर में आयोजित होने वाले समापन समारोह के साथ इस शिविर का समापन होगा। धर्म, संस्कृति और व्यक्तित्व विकास को एक मंच पर जोड़ने वाला यह आयोजन युवा पीढ़ी में संस्कारों और नैतिक मूल्यों के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है।

Pratahkal Bureau
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