कोटा। धर्मनगरी कोटा के रंगबाड़ी योजना सेक्टर-4 स्थित राधारानी पार्क में चल रही भव्य श्रीरामकथा के आठवें दिन भक्ति और श्रद्धा का ऐसा ज्वार उमड़ा कि पूरा पंडाल राममय हो गया। कथा के इस विशेष पड़ाव पर अधर्म के प्रतीक रावण के अहंकार के अंत और सत्य की शाश्वत विजय का जीवंत चित्रण किया गया, जिसने मौजूद हजारों श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

कथा व्यास और श्रीकामखेड़ा बालाजी महाराज के पुजारी पंडित तुलसीराम शर्मा ने अपनी ओजस्वी वाणी से लंका दहन और रावण वध के प्रसंगों का सजीव वर्णन किया। उन्होंने आध्यात्मिक गहराई के साथ बताया कि लंका का दहन केवल एक नगर का जलना नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर व्याप्त अहंकार और तामसी प्रवृत्तियों के भस्म होने का प्रतीक है। पंडित शर्मा ने रावण के चरित्र का विश्लेषण करते हुए कहा कि प्रकांड विद्वान और असीम शक्ति का स्वामी होने के बाद भी केवल 'अहंकार' के कारण रावण का समूल विनाश हुआ। इसके विपरीत, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, करुणा और धर्म का परित्याग नहीं किया, जो आज के समाज के लिए एक आदर्श जीवन दर्शन है।

जैसे ही कथा में हनुमान जी द्वारा लंका दहन का प्रसंग आया, पूरा पंडाल 'जय श्रीराम' के नारों से गुंजायमान हो उठा। इसके पश्चात रावण वध के मार्मिक प्रसंग ने भक्तों को भावुक कर दिया और कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। मंच का कुशल संचालन कर रहे कृष्णार्थी राकेश विजयवर्गीय ने कथा की सार्थकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीरामकथा केवल सुनने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की श्रेष्ठ कला सिखाती है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि वे श्रीराम के आदर्शों को केवल सुनें नहीं, बल्कि उन्हें अपने आचरण में उतारें। यह धार्मिक आयोजन समाज में नैतिकता और धर्म के संरक्षण का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।

Pratahkal Bureau

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