कोटा। राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी अंचल 'हाड़ौती' की वीर प्रसूता माटी और यहां की अनुपम सांस्कृतिक धरोहर अब वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान के साथ उभरने को तैयार है। हाल ही में आयोजित 'हाड़ौती ट्रैवल मार्ट' ने न केवल पर्यटन की नई राहें खोली हैं, बल्कि देशभर से आए दिग्गज टूर ऑपरेटर्स को भी यहां की असीम संभावनाओं से अभिभूत कर दिया है। कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बारां की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक दुर्गों और जल-पर्यटन के अनूठे संगम ने विशेषज्ञों को यह मानने पर मजबूर कर दिया है कि हाड़ौती आने वाले समय में देश का सबसे बड़ा पर्यटन हब बनने की क्षमता रखता है।

इस भव्य आयोजन के दौरान केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने पर्यटन क्षेत्र की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि वैश्विक जीडीपी में पर्यटन का योगदान 10 प्रतिशत तक है और भारत में इस क्षेत्र के भीतर विकास के असीम अवसर विद्यमान हैं। शेखावत ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि आयकर छूट के दायरे में हुई बढ़ोतरी से न केवल पर्यटन बल्कि अन्य व्यवसायों को भी अभूतपूर्व बल मिलेगा। उन्होंने हाड़ौती के विकास पर जोर देते हुए कहा कि इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए 'यूनिक आइडिया' और नवाचारों के साथ पर्यटन विकास की रूपरेखा तैयार करना अनिवार्य है। केंद्रीय मंत्री का मानना है कि यदि स्थानीय विशेषताओं को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ा जाए, तो हाड़ौती का कायाकल्प निश्चित है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हाड़ौती को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने का दृढ़ संकल्प दोहराया। बिरला ने कहा कि हाड़ौती की विरासत को दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचाना उनकी प्राथमिकता है और ट्रैवल मार्ट जैसे आयोजन इस दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने स्थानीय हितधारकों और टूर ऑपरेटर्स का आह्वान किया कि वे मिलकर एक ऐसा ईको-सिस्टम तैयार करें जिससे विदेशी और घरेलू पर्यटकों का रुझान इस अंचल की ओर तेजी से बढ़े।

देशभर के विभिन्न कोनों से आए टूर ऑपरेटर्स ने हाड़ौती की पर्यटन क्षमता को करीब से देखा और इसकी विविधता को सराहा। विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान के पारंपरिक पर्यटन रूट से हटकर हाड़ौती का यह नया सर्किट पर्यटकों को एक अनूठा और ताजा अनुभव प्रदान करेगा। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि सही दिशा और विजन के साथ काम किया जाए, तो वह दिन दूर नहीं जब कोटा और आसपास का क्षेत्र न केवल शिक्षा की काशी बल्कि 'पर्यटन की राजधानी' के रूप में भी अपनी धाक जमाएगा। यह आयोजन हाड़ौती के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए एक नई सुबह का संकेत है, जो स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story