कोटा: कल्पद्रुम महामंडल विधान का भव्य समापन, पूर्णाहुति व विश्वशांति महायज्ञ के साथ उमड़ा श्रद्धा का सागर
कोटा के महावीर नगर में आयोजित कल्पद्रुम महामंडल विधान का समापन गणिनी आर्यिका श्री 105 विभाश्री माताजी एवं विनयश्री माताजी के सान्निध्य में पूर्णाहुति, विश्वशांति महायज्ञ और भव्य श्रीजी शोभायात्रा के साथ सम्पन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

कोटा के महावीर नगर विस्तार योजना क्षेत्र में आयोजित कल्पद्रुम महामंडल विधान का समापन बुधवार को विधिवत पूर्णाहुति के साथ श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में सम्पन्न हुआ। श्री दिगंबर जैन मंदिर समिति के तत्वावधान में आयोजित इस विराट धार्मिक आयोजन ने न केवल जैन समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ा, बल्कि विश्व शांति और मानव कल्याण का सशक्त संदेश भी दिया।
परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री 105 विभाश्री माताजी एवं गणिनी आर्यिका श्री 105 विनयश्री माताजी (ससंघ, 12 पिच्छी) के मंगलमय सान्निध्य में संपन्न हुए इस विधान के अंतिम चरण में मंगलाष्टक, सहस्त्रनाम अभिषेक एवं शांति धारा पूजन विधान श्रद्धापूर्वक सम्पन्न कराया गया। इसके उपरांत विश्वशांति महायज्ञ एवं मंडल विसर्जन की पावन प्रक्रिया संपन्न हुई, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
मंत्री पारस लुंग्या ने बताया कि कार्यक्रम के समापन अवसर पर पांडाल से श्री दिगंबर जैन मंदिर तक भव्य श्रीजी शोभायात्रा निकाली गई। पालकी में विराजमान श्रीजी के साथ बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं भक्ति भाव से पदयात्रा करते हुए चल रही थीं। संपूर्ण मार्ग महावीर स्वामी के जयकारों से गूंजता रहा और श्रद्धालु नाचते-गाते आध्यात्मिक उल्लास में डूबे नजर आए।
समिति अध्यक्ष पवन ठौला ने बताया कि शोभायात्रा में महिलाएं गुलाबी रंग की साड़ियों में सुसज्जित होकर सिर पर कलश धारण किए हुए भक्ति नृत्य करती रहीं, जिससे दृश्य अत्यंत मनोहारी बन गया। इस दौरान गणिनी आर्यिका श्री 105 विभाश्री माताजी ससंघ श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करती हुई शोभायात्रा के साथ चलती रहीं।
प्रवचन के दौरान गणिनी आर्यिका श्री 105 विभाश्री माताजी ने कहा कि कल्पद्रुम महामंडल विधान का उद्देश्य तीर्थंकर बनना नहीं, बल्कि मनुष्य जीवन को सार्थक और कल्याणकारी बनाना है। धर्म भगवान के लिए नहीं, अपितु समस्त जीवों के कल्याण के लिए है। उन्होंने सम्यकदर्शन को जीवन की महानता का आधार बताते हुए कहा कि जैसे बीज को पोषण मिलने पर वह विशाल वृक्ष बनता है, उसी प्रकार प्रतिदिन अभिषेक, पूजन और आराधना से आत्मिक उन्नति सुनिश्चित होती है।
उन्होंने धर्म के वास्तविक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पूजा-पाठ के साथ-साथ संयम, करुणा, सरलता और सदाचार को जीवन में उतारना ही सच्ची आराधना है। वाणी और विचार की शुद्धता से ही कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है और देव-शास्त्र-गुरु के प्रति श्रद्धा कभी भी डगमगानी नहीं चाहिए।
महामंत्री पारस लुंग्या ने जानकारी दी कि इस अवसर पर उपाध्यक्ष मुकेश जैन, विनोद सकुनिया, कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश, मनोज कोटिया, संजय बाजल, शिखर ठग, प्रमोद ठग, अनुराग जैन, प्रकाश पाटनी, ललित लुंग्या और मुकेश सांवला सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। कल्पद्रुम महामंडल विधान का यह आयोजन कोटा में आध्यात्मिक चेतना और सामूहिक श्रद्धा का स्मरणीय अध्याय बनकर समाप्त हुआ।

Pratahkal Bureau
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