कोटा में गौ माता को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा देने के लिए ज्ञापन सौंपा
गौ पलसम्मान आह्वान अभियान के तहत साधु-संतों और संगठनों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की।

कोटा कलेक्ट्रेट पर गौ पलसम्मान आह्वान अभियान के दौरान तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते महामंडलेश्वर साध्वी हेमां सरस्वती, अनिल माहेश्वरी और अन्य गौभक्त।
देशव्यापी ‘गौ पलसम्मान आह्वान अभियान’ के तहत सोमवार को कोटा में गोभक्तों, साधु-संतों और सामाजिक संगठनों ने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित लाडपुरा तहसील कार्यालय, नयापुरा में तहसीलदार राजवीर यादव को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के साथ 21,155 नागरिकों के हस्ताक्षर युक्त फाइल पत्र (दस्ता) भी प्रस्तुत किया गया।
यह आयोजन महामंडलेश्वर साध्वी हेमां सरस्वती के सानिध्य में प्रातः 11 बजे संपन्न हुआ। इस दौरान कार्यक्रम संयोजक अनिल माहेश्वरी, गजेन्द्र भार्गव महंत गोदावरी धाम, महेंद्र गोविंदाचार्य चंडीगढ़, पंकज मेहता, यज्ञदत्त हाड़ा, समाजसेवी अरुण भार्गव, गोपाल माहेश्वरी, के के माहेश्वरी, गिरधर बडेरा बांके बिहारी मंदिर समिति, प्रमोद चतर्वेदी, मंगलमुखी मनीषा दीदी, रमेश चंद्र गौतम, रजत सुमन, सूरज, पंकज शर्मा, अरुण शर्मा, अनिल गुप्ता, लोकेश शर्मा, मुकेश मंत्री सहित बड़ी संख्या में गोभक्त उपस्थित रहे।
ज्ञापन से पूर्व कलेक्ट्रेट चौराहे पर एकत्रित होकर गोभक्तों ने संकीर्तन शोभा यात्रा निकाली। प्रतिभागियों के हाथों में गौ रक्षा से संबंधित तख्तियां, बैनर और झंडियां थीं, जिन पर “गौ माता की रक्षा ही हमारी सामूहिक चेतना का पुनर्जन्म है”, “गौ सेवा ही सच्ची सेवा है”, “राष्ट्रमाता गौ” और “गौ हत्या बंद करो, जय गौ माता” जैसे नारे अंकित थे। शोभायात्रा में राधा कृष्ण की झांकी मुख्य आकर्षण रही, वहीं गौ माता का बच्चा बछड़ा भी साथ था, जिसे भीषण गर्मी को देखते हुए छाया में रखा गया। इस अवसर पर मातृशक्ति और युवा सहित सैकड़ों लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने गौ रक्षा को सभी का नैतिक कर्तव्य बताते हुए व्यापक जनजागरण की आवश्यकता पर बल दिया। प्रदर्शनकारियों ने गौ माता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
ज्ञापन में गौमाता को आधिकारिक रूप से ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने, देश में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध हेतु कड़ा केंद्रीय कानून बनाने, गौवंश की तस्करी, अवैध वधशालाओं और पशु क्रूरता पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई। इसके साथ ही सरकारी गौशालाओं में व्याप्त अव्यवस्था को दूर कर गौवंश की समुचित देखभाल सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि गौ संरक्षण को लेकर व्यापक सामाजिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग को भी मुखर करता नजर आया।

Pratahkal Bureau
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