कोटा: बजट पूर्व संवाद में गूंजी किसानों और पशुपालकों की आवाज, चैनसिंह राठौड़ ने रखी विकास की विस्तृत रूपरेखा
जयपुर में आयोजित बजट पूर्व संवाद में कोटा-बूंदी डेयरी अध्यक्ष चैनसिंह राठौड़ ने मुख्यमंत्री कार्यालय में किसानों और पशुपालकों के लिए ऋण माफी, गोपाल क्रेडिट कार्ड विस्तार और 2 लाख लीटर क्षमता वाले आधुनिक डेयरी प्लांट जैसे महत्वपूर्ण सुझाव रखे। उन्होंने हाड़ी रानी सरस प्लाजा की मांग के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का विजन पेश किया, जिसमें शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति रही।

जयपुर स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय के गलियारों में जब आगामी बजट को लेकर मंथन शुरू हुआ, तो हाड़ौती की कृषि और डेयरी अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने वाला एक सशक्त खाका उभरकर सामने आया। मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित महत्वपूर्ण 'बजट पूर्व संवाद' कार्यक्रम में कोटा-बूंदी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ एवं कोटा सहकारी भूमि विकास बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष चैनसिंह राठौड़ ने किसानों और पशुपालकों के हितों की पुरजोर पैरवी की। राठौड़ ने न केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दूरदर्शी सुझावों की एक लंबी फेहरिस्त भी रखी। उनके इन सुझावों के केंद्र में 'हाड़ी रानी सरस प्लाजा' की स्थापना का प्रस्ताव रहा, जिसे कोटा में डेयरी उत्पादों के विपणन और रोजगार सृजन के लिए एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। उन्होंने एक ऐसे आधुनिक भवन की कल्पना की है, जो न केवल सरस उत्पादों का बड़ा केंद्र बने, बल्कि सामुदायिक आयोजनों के माध्यम से सामाजिक जुड़ाव का माध्यम भी बने।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को आधार बनाते हुए राठौड़ ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि के समानांतर पशुपालन को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से महिला दुग्ध समितियों को सशक्त करने के लिए प्रोत्साहन राशि और उनके उपविधानों में संशोधन की मांग की, ताकि ये समितियां दुग्ध के अलावा अन्य आवश्यक उत्पादों की बिक्री कर सकें। आर्थिक राहत के मोर्चे पर उन्होंने एक बड़ा प्रस्ताव रखते हुए राज्य सरकार से मांग की कि वर्ष 2026-27 की अवधि में सहकारी भूमि विकास बैंक से लिए गए ऋणों की 50 प्रतिशत राशि माफ की जाए। इसके साथ ही उन्होंने विवादित, अतिक्रमित और बिना रहन वाले गिरवी प्रकरणों में किसानों को राहत देने के साथ-साथ धारा 89/103 के तहत बैंक संपत्ति घोषित भूमि को मुआवजा योजना में शामिल करने का तकनीकी सुझाव भी दिया।
सहकारी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से राठौड़ ने भूमि विकास बैंकों में लंबे समय से अटकी भर्तियों को तुरंत शुरू करने और पिछले दो दशकों से अधिक समय से सेवाएं दे रहे संविदाकर्मियों के नियमितीकरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कोटा-बूंदी दुग्ध संघ के लिए 2,00,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले एक अत्याधुनिक और उच्च तकनीकी आधारित डेयरी प्लांट की स्थापना का प्रस्ताव रखा, जो इस क्षेत्र की प्रसंस्करण क्षमता में मील का पत्थर साबित होगा। साथ ही, गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना के दायरे को बढ़ाते हुए इसमें नगरपालिका क्षेत्र की समितियों को शामिल करने और 2 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण देने की मांग की गई। इस उच्च स्तरीय संवाद कार्यक्रम में राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष सी.आर. चौधरी, अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार, अखिल अरोड़ा, प्रमुख शासन सचिव वैभव गालरिया और मंजू राजपाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति ने इन सुझावों की गंभीरता को और अधिक बढ़ा दिया है। राठौड़ द्वारा उठाए गए ये बिंदु आगामी बजट में कोटा संभाग के किसानों और पशुपालकों के लिए स्वर्णिम द्वार खोल सकते हैं।

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