शिक्षा की काशी कोटा बना नेत्र चिकित्सा प्रशिक्षण का नया केंद्र, देशभर के 40 से अधिक युवा डॉक्टरों को मिला विशेष प्रशिक्षण
कोटा के सुवि नेत्र चिकित्सालय में मेडिकल रेटिना फेलोशिप का समापन हुआ। देशभर के 40 से अधिक युवा नेत्र चिकित्सकों को प्रशिक्षण देकर शहर ने नई पहचान बनाई।

तस्वीर में सुवि नेत्र चिकित्सालय कोटा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अतिथि और चिकित्सक फेलोशिप प्रमाण-पत्र प्रदान करते हुए नजर आ रहे हैं।
कोटा में सुवि नेत्र चिकित्सालय एवं लेसिक लेजर सेंटर में मेडिकल रेटिना फेलोशिप प्रशिक्षण के समापन, प्रमाण-पत्र वितरण और नई फेलो के स्वागत के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ फिजिशियन एवं एपीआई के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. के. पारीक मुख्य अतिथि रहे, जबकि राजकीय संभागीय सार्वजनिक पुस्तकालय, कोटा के संभागीय पुस्तकालयाध्यक्ष एवं प्रमुख तथा कोटा संभाग के सार्वजनिक पुस्तकालयों के नोडल अधिकारी डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान मेडिकल रेटिना फेलोशिप का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाली डॉ. हिमांशी भारद्वाज को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं आंध्र प्रदेश के ओंगोल शहर से आईं डॉ. ललिता मनासा ने सुवि नेत्र चिकित्सालय में नई मेडिकल रेटिना फेलो के रूप में अपना प्रशिक्षण प्रारंभ किया। इस अवसर पर अतिथियों एवं वरिष्ठ चिकित्सकों ने दोनों युवा चिकित्सकों को सफल, उज्ज्वल और सेवाभावी भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
सुवि नेत्र चिकित्सालय के निदेशक एवं वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय, डॉ. विदुषी शर्मा तथा रेटिना विशेषज्ञ डॉ. निपुण बागरेचा ने बताया कि मेडिकल रेटिना फेलोशिप का उद्देश्य युवा नेत्र चिकित्सकों को रेटिना रोगों की आधुनिक जांच, सटीक निदान, वैज्ञानिक उपचार तथा दीर्घकालीन प्रबंधन का व्यापक व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान फेलोज़ को आधुनिक तकनीकों के साथ रोगियों की समस्याओं को संवेदनशीलता से समझने, उचित चिकित्सकीय निर्णय लेने, प्रभावी संवाद स्थापित करने तथा टीम के साथ समन्वयपूर्वक कार्य करने का भी प्रशिक्षण दिया जाता है।
मुख्य अतिथि डॉ. के. के. पारीक ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में निरंतर अध्ययन, व्यावहारिक प्रशिक्षण और अनुभवी चिकित्सकों का मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान तेजी से विकसित हो रहा है, इसलिए प्रत्येक चिकित्सक को जीवनभर विद्यार्थी बने रहना चाहिए। उनके अनुसार किसी चिकित्सक की वास्तविक पहचान केवल उसके ज्ञान और तकनीकी कौशल से नहीं, बल्कि रोगियों के प्रति संवेदनशील, विनम्र, नैतिक और जिम्मेदार व्यवहार से भी होती है। उन्होंने कहा कि एक अच्छा चिकित्सक रोग का उपचार करने के साथ-साथ रोगी और उसके परिवार में विश्वास तथा आशा का संचार भी करता है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि फेलोशिप प्रशिक्षण युवा चिकित्सकों को विशेषज्ञता प्राप्त करने, जटिल रोगों को गहराई से समझने तथा उनका वैज्ञानिक उपचार करने में सक्षम बनाता है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ चिकित्सकों से प्राप्त व्यावहारिक मार्गदर्शन आगे चलकर हजारों रोगियों के लिए लाभकारी सिद्ध होता है। उन्होंने युवा चिकित्सकों से नवीनतम चिकित्सा तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े रहने तथा चिकित्सा के उच्च नैतिक मूल्यों का पालन करने का आह्वान किया।
रेटिना विशेषज्ञ डॉ. निपुण बागरेचा ने कहा कि दक्षिण भारत सहित देश के विभिन्न राज्यों और शहरों से नेत्र चिकित्सकों का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए ‘शिक्षा की काशी’ कोटा आना शहर के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि शिक्षा नगरी कोटा अब नेत्र चिकित्सा प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। सुवि नेत्र चिकित्सालय में अब तक देशभर के 40 से अधिक युवा नेत्र चिकित्सकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है, जो कोटा को नेत्र चिकित्सा प्रशिक्षण के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

Pratahkal Hub
प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"
