कोटा के ईथॉस हॉस्पिटल में शुरू हुई मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी सुविधा, स्ट्रोक का होगा आधुनिक इलाज
हाड़ौती क्षेत्र में पहली बार शुरू हुई इस तकनीक से अब ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों का 24 घंटे के भीतर सफल उपचार संभव होगा।

कोटा। हाड़ौती अंचल के चिकित्सा इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए विवेकानंद नगर स्थित ईथॉस हॉस्पिटल ने अत्याधुनिक मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी तकनीक के माध्यम से लकवा (स्ट्रोक) के उपचार में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है। पूरे संभाग में एकमात्र सेंटर के रूप में उभरे ईथॉस हॉस्पिटल ने इस जीवनदायी सेवा को शुरू कर क्षेत्र के हजारों मरीजों के लिए जयपुर, दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों की दौड़ को समाप्त कर दिया है। यह नई तकनीक न्यूरो-इंटरवेंशन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध हो रही है, जिसने गंभीर रूप से ग्रसित मरीजों को पुनर्जीवन देना प्रारंभ कर दिया है।
ईथॉस हॉस्पिटल के एचओडी न्यूरोसाइंसेज डीएम (न्यूरोलॉजी) डॉ. अमित देव ने इस जटिल प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी में बिना किसी बड़े ऑपरेशन के, कैथेटर के माध्यम से जांघ की धमनी से होते हुए मस्तिष्क तक पहुँचा जाता है। यहाँ एक विशेष स्टेंट रिट्रीवर की सहायता से रक्त के थक्के को सीधे बाहर निकाल दिया जाता है। चिकित्सकों के अनुसार, इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता इसका विस्तृत 'गोल्डन आवर' है। जहाँ पारंपरिक उपचार में केवल 4.5 घंटे की समयसीमा प्रभावी मानी जाती थी, वहीं अब चयनित मामलों में 6 से 24 घंटे के अंतराल में भी मरीजों का सफल उपचार संभव है, जो दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हॉस्पिटल के निदेशक दाधीच एवं जितेंद्र गोयल ने संयुक्त रूप से बताया कि अब तक कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के मरीजों को इस स्तर के उपचार के लिए रेफर करना पड़ता था, जिससे बहुमूल्य समय के अभाव में जान का जोखिम बना रहता था। अब ईथॉस हॉस्पिटल में यह सुविधा उपलब्ध होने से स्थानीय स्तर पर ही त्वरित चिकित्सा सुनिश्चित हो सकेगी।
अस्पताल की इस दक्षता का प्रमाण हाल ही में वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आशीष पेमावत के नेतृत्व में सफल हुए एक केस से मिलता है। मरीज बंसीलाल मालव को शरीर के दाहिने हिस्से में कमजोरी और अचेत अवस्था में अस्पताल लाया गया था, जहाँ जाँच में 'लेफ्ट एमसीए टेरिटरी ब्रेन स्ट्रोक' की पुष्टि हुई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तत्काल आईसीयू में भर्ती कर सेरेब्रल एंजियोग्राफी के माध्यम से अवरुद्ध धमनी (Left MCA M1) की पहचान की गई। इसके पश्चात अत्याधुनिक मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी (ADAPT तकनीक) का प्रयोग किया गया। प्रथम प्रयास में ही पूर्ण रीकैनालाइजेशन (mTICI 3) प्राप्त होने से मस्तिष्क का रक्त प्रवाह सामान्य हो गया और मरीज में सुधार के लक्षण ऑपरेशन टेबल पर ही दिखाई देने लगे। विशेषज्ञ निगरानी में महज चार दिनों में पूर्णतः स्वस्थ होकर मरीज को 24 फरवरी को डिस्चार्ज कर दिया गया।
संस्थान के सीईओ हर्ष दाधीच एवं स्ट्रैटेजिक पार्टनर रुपेश माथुर ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक दवा आधारित उपचार की तुलना में यह तकनीक 80-90 प्रतिशत मामलों में रक्त प्रवाह बहाल करने में सक्षम है, विशेषकर बड़े थक्कों के मामलों में जहाँ दवाएं अक्सर निष्प्रभावी रहती हैं। सुपरइन्टेन्डेन्ट डॉ. राजेश गोयल ने जनहित में अपील जारी करते हुए कहा कि शरीर में कमजोरी, बोलने में कठिनाई, चेहरे का टेढ़ापन या दृष्टि दोष जैसे स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही बिना समय गंवाए विशेषज्ञ सहायता लें, क्योंकि समय पर की गई पहचान ही जीवन रक्षा की वास्तविक कुंजी है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
