कोटा में 133वें ऐतिहासिक राष्ट्रीय मेला दशहरा 2026 के तहत शनिवार, 17 अक्टूबर की रात दशहरा मैदान स्थित श्रीराम रंगमंच पर रामायण के सीता हरण और जटायु-रावण युद्ध के प्रसंगों का मंचन किया गया। राघवेंद्र कला संस्थान के कलाकारों ने सीता हरण, जटायु वध और शबरी उद्धार सहित विभिन्न प्रसंगों का सजीव मंचन किया। सीता हरण के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया, जबकि रावण और जटायु के बीच हुए युद्ध के मंचन ने दर्शकों को रोमांचित किया।

रामलीला कार्यक्रम का शुभारंभ महापौर अनुसूईया गोस्वामी, सत्यप्रकाश शर्मा, महावीर सुवालका, सुनीता व्यास, जगदीश जिंदल, महेंद्र शर्मा, कुलदीप माथुर, आशा त्रिवेदी, पार्षद सुनीता सेन, नीतू कंवर, प्रतिभा सुमन और उम्मेद सिंह सोलंकी ने किया। सभी ने श्रीराम-जानकी के पावन प्रतिरूप की आरती उतारी और भगवान से नगर की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर मेला समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में शहरवासी मौजूद रहे। कलाकारों के अभिनय के दौरान पूरा पंडाल 'जय श्री राम' के उद्घोष से गूंज उठा।

मंचन में जयंत मिलन, ऋषि अत्रि मिलन, मुनि अगस्त्य भेंट, पंचवटी वास, सीता हरण, जटायु वध और शबरी उद्धार के प्रसंग प्रस्तुत किए गए। कलाकारों ने रामायण की घटनाओं को मंच पर जीवंत रूप देकर दर्शकों को कथा से जोड़े रखा।

सीता हरण के प्रसंग में मारीच मायावी स्वर्ण मृग का रूप धारण करता है। उसे देखकर भगवान श्रीराम उसका वध करने के लिए वन में जाते हैं। बाण लगने पर मारीच श्रीराम की आवाज में लक्ष्मण को पुकारता है। माता सीता की व्याकुलता और बार-बार आग्रह करने पर लक्ष्मण कुटिया के चारों ओर लक्ष्मण रेखा खींचकर श्रीराम की खोज में निकल पड़ते हैं।

इसके बाद रावण साधु का वेश धारण कर भिक्षा मांगने पहुंचता है। माता सीता के लक्ष्मण रेखा पार करते ही रावण उनका हरण कर लेता है। इस दृश्य के मंचन के दौरान पंडाल में मौजूद कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं और उनकी रुलाई फूट पड़ी।

माता सीता को रावण से बचाने के लिए वीर पक्षी जटायु रास्ते में उसका सामना करता है। दोनों के बीच भीषण युद्ध होता है। रावण और जटायु के साहसिक संघर्ष का मंचन देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे और तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

सीता की खोज के क्रम में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की भेंट ऋषियों और सुग्रीव से होती है। इसके बाद मंच पर शबरी मिलन और उद्धार का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। भक्त शबरी भगवान श्रीराम के आगमन की प्रतीक्षा में मार्ग को बुहारकर साफ कर रही थीं और भजन गा रही थीं। मतंग ऋषि के आशीर्वाद के अनुसार जब भगवान श्रीराम उनकी कुटिया में पहुंचे, तो शबरी भावुक होकर उनके चरणों से लिपट गईं।

प्रेम और वात्सल्य के प्रतीक इस प्रसंग में भगवान श्रीराम ने शबरी के जूठे बेर प्रेमपूर्वक खाए और उन्हें मोक्षदायिनी नवधा भक्ति का दिव्य ज्ञान प्रदान किया। इस दृश्य ने दर्शकों को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। राष्ट्रीय मेला दशहरा 2026 के अंतर्गत प्रस्तुत रामलीला में रामायण के इन प्रसंगों के माध्यम से कलाकारों ने सीता हरण, जटायु के संघर्ष और शबरी की भक्ति को मंच पर साकार किया।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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