कोटा में दवा विक्रेताओं की बड़ी हुंकार: RGHS भुगतान संकट पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का कड़ा रुख, अधिकारियों को दिए तत्काल निर्देश
कोटा में RGHS भुगतान के संकट को लेकर केमिस्ट एलायंस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से गुहार लगाई। अध्यक्ष क्रांति जैन व राजकुमार जैन के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधिमंडल की समस्या देख ओम बिरला ने राजस्थान सरकार के अधिकारियों को तत्काल भुगतान के कड़े निर्देश दिए हैं। जानें कैसे इस हस्तक्षेप से सुलझेगी दवा विक्रेताओं की बड़ी समस्या।

कोटा। राजस्थान सरकार की स्वास्थ्य योजना (RGHS) के तहत लंबित भुगतानों को लेकर प्रदेश के दवा विक्रेताओं का धैर्य अब जवाब दे रहा है। शिक्षा की नगरी कोटा में आज यह मुद्दा उस समय गरमा गया जब कोटा जिला केमिस्ट एलायंस के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सीधे देश की सबसे बड़ी पंचायत के संरक्षक, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के द्वार पर दस्तक दी। यह मुलाकात केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि राजस्थान के हजारों दवा विक्रेताओं के अस्तित्व और आम जनता को मिलने वाली निर्बाध स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक गंभीर पुकार थी।
घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब कोटा जिला केमिस्ट एलायंस के अध्यक्ष क्रांति जैन और राजस्थान केमिस्ट अलायन्स के संयुक्त सचिव राजकुमार जैन के नेतृत्व में दवा विक्रेताओं का एक समूह अपनी मांगों को लेकर मुखर हुआ। प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि किस प्रकार RGHS के करोड़ों रुपये के लंबित भुगतानों के कारण केमिस्टों की आर्थिक कमर टूट रही है और उनके सामने व्यापार को सुचारू रूप से चलाने का संकट खड़ा हो गया है। केमिस्टों ने स्पष्ट किया कि यदि भुगतान की प्रक्रिया में यही सुस्ती बनी रही, तो इसका सीधा असर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों को मिलने वाली दवाओं की उपलब्धता पर पड़ सकता है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस पूरे मामले को अत्यंत संवेदनशीलता और गंभीरता से लिया। केमिस्टों की पीड़ा को समझते हुए उन्होंने तत्काल प्रभाव से राजस्थान सरकार के संबंधित उच्चाधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए। बिरला ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इस महत्वपूर्ण भुगतान में हो रही देरी को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता और उन्होंने रुके हुए भुगतान को अविलंब जारी करने के कड़े निर्देश दिए। इस वार्ता के दौरान कोटा जिला केमिस्ट एलायंस के सचिव अभिमन्यु भावनानी सहित अन्य कई प्रमुख पदाधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस समस्या के विभिन्न तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की।
ओम बिरला के इस हस्तक्षेप ने न केवल कोटा बल्कि पूरे राजस्थान के दवा विक्रेताओं में आशा की एक नई किरण जगाई है। केमिस्टों का मानना है कि इस स्तर से दिए गए निर्देशों के बाद प्रशासन की नींद टूटेगी और पिछले कई महीनों से अटका हुआ पैसा जल्द ही खातों में होगा। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि जब स्वास्थ्य सेवाओं और व्यापारियों के हितों पर आंच आती है, तो लोकतांत्रिक नेतृत्व की सक्रियता ही समाधान का मार्ग प्रशस्त करती है। अब निगाहें राजस्थान सरकार और संबंधित विभाग पर टिकी हैं कि वे कितनी तेजी से इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करते हैं।

Pratahkal Bureau
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