कोटा। कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) और कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) के अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देशित किया है कि चम्बल नदी के रूप में प्राप्त प्राकृतिक वरदान के बावजूद शहर में पेयजल की किल्लत किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगी। बुधवार को सर्किट हाउस में आयोजित महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान विधायक ने स्पष्ट किया कि जब शहर के तीन फिल्टर प्लांटों की कुल उत्पादन क्षमता 570 एमएलडी है—जो कि 30 लाख की आबादी के लिए पर्याप्त है—तो मात्र 17 लाख की आबादी वाले कोटा शहर में पानी का संकट खड़ा होना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि ग्रीष्म ऋतु की आहट के साथ ही जलापूर्ति की समस्त तैयारियां पूर्ण कर ली जाएं, अन्यथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बैठक में अमृत योजना के द्वितीय चरण की टेंडर प्रक्रिया में हो रहे विलंब पर विधायक ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भाजपा शासन का मुख्य ध्येय प्रत्येक कॉलोनी के अंतिम छोर तक पर्याप्त दबाव के साथ स्वच्छ जल पहुंचाना है, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण जनता लाभ से वंचित है। इस संबंध में उन्होंने बैठक के दौरान ही जलदाय विभाग के मुख्य अभियंता देवराज सोलंकी से दूरभाष पर वार्ता कर कोटा के लंबित प्रस्तावों को तत्काल स्वीकृति प्रदान करने और योजना में आ रहे गतिरोध को दूर कर जलापूर्ति व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के निर्देश दिए।

विधायक शर्मा ने अधिकारियों को बताया कि शहर के लिए 3.5 करोड़ रुपये के ग्रीष्मकालीन आकस्मिक कार्य स्वीकृत हैं, अतः प्रभावित क्षेत्रों में अभी से कार्य शुरू किए जाएं। उन्होंने दादाबाड़ी, महावीर नगर विस्तार योजना और बालाकुण्ड जैसे सघन आबादी वाले क्षेत्रों में पानी की शिकायतों का तत्काल समाधान करने तथा बरड़ा बस्ती, क्रेशर बस्ती एवं तालाब गांव जैसे इलाकों में टैंकरों के माध्यम से नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि विद्यार्थियों को एक कमरा किराए पर देने वाले मकान मालिकों को व्यावसायिक दर (Commercial Rates) पर बिल थमाना अनुचित है; ऐसे मकानों को घरेलू श्रेणी में ही रखा जाए।

कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने पुरानी लाइनों से टैपिंग कर नए क्षेत्रों में पानी देने की प्रथा को बंद करने और नया इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने को कहा, जिसके लिए 15वें वित्त आयोग एवं अमृत योजना के तहत पर्याप्त बजट उपलब्ध है। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि नई पाइपलाइन बिछने के बाद पुरानी लाइनों को तुरंत बंद किया जाए ताकि रिसाव और गंदे पानी की समस्या खत्म हो सके। अकेलगढ़ से निकल रही 1000 एमएम की मुख्य लाइन के शेष 40 प्रतिशत लीकेज वाले हिस्से को भी तत्काल बदलने के निर्देश दिए गए ताकि बहुमूल्य जल व्यर्थ न बहे। इस बैठक में अतिरिक्त मुख्य अभियंता दीपक कुमार झा, अधिशाषी अभियंता श्याम माहेश्वरी, ललित शर्मा, जीवनधर राठौर, अभिषेक मिश्रा सहित सहायक अभियंता विमल नागर, डी पी चौधरी, अशोक बमनावत, दीक्षांत मित्तल, अनिल मित्तल, अभिषेक जैन, पवन सिंह, घनश्याम कलवार और रिजवान मुल्तानी सहित अन्य तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे।

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Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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