कोटा: डॉ. दयाकृष्ण विजय की जयंती पर भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन
साहित्य संस्कृति संवर्धन समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने काव्य पाठ के जरिए राष्ट्रवादी विचारक डॉ. विजय को दी श्रद्धांजलि।

कोटा के विजयवर्गीय भवन में आयोजित काव्य गोष्ठी के दौरान मंचासीन अतिथि विष्णु शर्मा ‘हरिहर’, भगवती प्रसाद गौतम, रामेश्वर शर्मा और महेश विजय डॉ. दयाकृष्ण विजय के साहित्यिक अवदान पर चर्चा करते हुए।
कोटा, 8 अप्रैल। डॉ. दयाकृष्ण विजय स्मृति साहित्य संस्कृति संवर्धन समिति, कोटा के तत्वावधान में डॉ. दयाकृष्ण विजय की जयंती के अवसर पर बुधवार सायंकाल विजयवर्गीय भवन नयापुरा में काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद, चित्तौड़ प्रांत के अध्यक्ष विष्णु शर्मा ‘हरिहर’, कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार भगवती प्रसाद गौतम, विशिष्ट अतिथि के रूप में रामेश्वर शर्मा ‘रामू भैया’ एवं कोटा जिला साहित्य परिषद अध्यक्ष पूर्व महापौर महेश विजय मंचस्थ रहे। काव्य गोष्ठी का सफल संचालन विष्णु शर्मा ‘हरिहर’ ने किया तथा आभार व्यक्त राष्ट्रवादी कवि डॉ. दयाकृष्ण विजय के पुत्र भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष हेमंत विजयवर्गीय द्वारा किया गया।
साहित्यिक अवदान और व्यक्तित्व पर चर्चा
अतिथियों ने साहित्यकार डॉ. विजय के बारे में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि "डॉ दया कृष्ण विजय अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे एवम दो बार राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष रहे एवं उनकी 52 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।" वे देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों में से एक थे और उन्हें अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (अमेरिका) में भी उन्हें सम्मानित किया गया तथा उनकी पुस्तकें देश-विदेश के पुस्तकालयों में संग्रहीत हैं, उन्होंने अनेक कालजयी रचनाओं की रचना की।
आकाशवाणी कोटा के सहायक अधिकारी रामनारायण हलधर ने डॉ. दयाकृष्ण विजय के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि "डॉ. विजय साहित्य जगत में राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख मनीषी रहे हैं, उनकी रचनाओं के आलोक में भी वे लंबे समय तक याद रहेंगे। उन्हें आसानी से भुलाया नहीं जा सकेगा।"
काव्य पाठ और राष्ट्रभक्ति की गूँज
गोष्ठी में युवा कवि हैम सिंह ने "प्रेम में किंचित दोष नहीं" कविता पर खूब तालियां बटोरी, तो वहीं महेश विजय ‘मां भारती’ ने "हे कृष्ण कृपा कीजो, हे कृष्णा दया कीजो, ई धरती पर फिर से दया कृष्णा दीजो" के द्वारा भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रेम शास्त्री ने संविधान के अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर ओजश्वी कविता प्रस्तुत करते हुए कहा— "धारा हट गई, घाटी बच गई, वरना हो रही थी बर्बाद, जिंदाबाद, जिंदाबाद, राष्ट्रवादी जिंदाबाद।"
सुप्रसिद्ध कवि बाबू बंजारा ने महाराणा प्रताप के घायल चेतक पर कविता प्रस्तुत करते हुए संपूर्ण माहौल को भावुक कर दिया— "सूतो काँई रे चेतक, युद्ध में पवन बेग सूं भाग रे, भायली ओर निभाले रे, धरा की सेवा करलेंवा रे।" इसी क्रम में श्रीमती ममता 'महक' ने मातृभूमि वंदना पर कविता प्रस्तुत की— "नमन करो इसके कण-कण को, कंकड़ हो या पानी हो।"
साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति
काव्य गोष्ठी में अनेक कवियों ने डॉ. विजय के सम्मान में रचित कविताएं प्रस्तुत कीं तथा उनकी रचनाओं का वाचन किया, जिसमें राष्ट्रवाद, संस्कार संवर्धन, देश विभाजन एवं सामाजिक समस्याओं जैसे विषयों पर काव्य पाठ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य रूप से भगवती प्रसाद गौतम, रामेश्वर शर्मा ‘रामू भैया’, महेश विजय ‘मां भारती’, कवि बाबू बंजारा, योगीराज योगी, रामनारायण हलधर, देवकी दर्पण, विजय जोशी, हेमराज सिंह ‘हेम’, राजेंद्र शर्मा मोरपा, डॉ. इंदुबाला, श्रीमती शैलजा विजयवर्गीय, श्रीमती संगीता परमेन्द्र, कमलेश चौधरी ‘कमल’, श्रीमती रमा शर्मा ‘निर्भीक’, श्रीमती ममता ‘महक’, भगवत सिंह ‘मयंक’, नहुष व्यास, राम शर्मा कापरेन, डॉ. वीणा अग्रवाल, प्रेम शास्त्री, कालीचरण राजपूत, राम मनोहर कौशिक, देवकी दाधीच, जी.पी. खंडेलवाल ‘आनंद’, रघुनंदन ‘हठीला’ सहित अनेक साहित्यकारों ने काव्यपाठ किया।
इसके अतिरिक्त महावीर विजय, रवि विजय, अरविंद सिसोदिया, रजनीश राणा, राजीव शाक्यवाल, प्रकाश विजय, प्रमोद विजय, राजेन्द्र विजय, ओमप्रकाश विजय, विनोद विजय, पुरुषोत्तम दाधीच, किशोर सिंह, अमित उराड़िया आदि गणमान्य जन भी उपस्थित रहे।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
