कोटा, 13 जुलाई। शहर के हृदय स्थल दादाबाड़ी स्थित शिव पार्क में घोर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां सरेआम 9 हरे-भरे पेड़ों को काट दिया गया। घटना के 8 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इन पेड़ों को किसने और क्यों काटा। पार्क में आज भी पेड़ों का सूखा खून, पत्ते और लकड़ियों के ढेर बिखरे पड़े हैं, लेकिन शासन और प्रशासन पूरी तरह बेखबर बना हुआ है। एक तरफ जहां सरकार और विभिन्न संस्थाएं "एक पेड़ मां के नाम, हरियालौ राजस्थान" जैसे सघन पौधारोपण अभियान चलाकर शहर को ऑक्सीजन पार्क बनाने का प्रयास कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर पेड़ों की इस बेदर्दी से हुई कटाई ने अभियानों की धज्जियां उड़ा दी हैं।

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दादाबाड़ी थाने की पुलिस ने केवल एक बार घटनास्थल का निरीक्षण कर अपनी जिम्मेदारियों की इतिश्री कर ली है। वृक्षों को इतनी क्रूरता से काटने का निर्णय किसका था, इसका पता लगाने में अब तक कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पूरे मामले की सूचना नगर निगम आयुक्त और केडीए के एईएन तक पहुंचाई जा चुकी है, साथ ही जन प्रतिनिधियों को भी अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक किसी ने भी कोई कठोर कार्यवाही करने का निर्णय नहीं लिया है। मोहल्ले में कुछ लोग दबी जुबान से पेड़ों के काटे जाने की पुष्टि जरूर कर रहे हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि पेड़ों को छांटने के बजाय काटा ही जाना था, तो पौधारोपण अभियान का औचित्य क्या है और आम नागरिक इसकी शिकायत आखिर किससे करे।

Pratahkal Newsroom

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