कोटा के अंतरराष्ट्रीय अल्ट्रा एंड्योरेंस साइक्लिस्ट एवं मैराथन धावक नितिन सैनी ने अमेरिका में आयोजित विश्व की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन TransAm Bike Race सफलतापूर्वक पूरी कर नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने अमेरिका के पश्चिमी तट Astoria (Oregon) से लेकर Washington DC के Lincoln Memorial तक लगभग 6000 किलोमीटर की इस सेल्फ-सपोर्टेड अल्ट्रा साइक्लिंग चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा किया। उनकी यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि कोटा, राजस्थान और पूरे भारत के लिए गौरव का विषय है।

TransAm Bike Race को दुनिया की सबसे कठिन Self-Supported Ultra Endurance Cycling Race में से एक माना जाता है। इस प्रतियोगिता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी भी प्रतिभागी को सपोर्ट वाहन, टीम, मैकेनिक या व्यक्तिगत सहायता उपलब्ध नहीं होती। पूरी यात्रा के दौरान प्रतिभागी को स्वयं अपना रूट नेविगेट करना, भोजन और पानी की व्यवस्था करना, साइकिल की मरम्मत करना, होटल या विश्राम स्थल ढूँढना, मौसम, ट्रैफिक और सुरक्षा के अनुसार निर्णय लेना तथा सीमित नींद के साथ लगातार कई दिनों तक साइक्लिंग करनी होती है। यही कारण है कि इस प्रतियोगिता को केवल शारीरिक क्षमता ही नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, रणनीति, आत्मनिर्भरता और धैर्य की भी कठिन परीक्षा माना जाता है।

TransAm Bike Race के दौरान नितिन सैनी ने अमेरिका के विभिन्न राज्यों से होकर हजारों किलोमीटर की दूरी तय की। इस यात्रा में उन्हें लगातार कई दिनों तक प्रतिदिन 250 से 350 किलोमीटर तक साइक्लिंग करनी पड़ी। उन्होंने ऊँचे पर्वतीय मार्गों की लंबी और कठिन चढ़ाइयों का सामना किया, कई स्थानों पर 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में साइक्लिंग की, तेज़ बारिश और लगातार बदलते मौसम की चुनौतियों से जूझे, सामने से चलने वाली तेज़ हवाओं के बीच आगे बढ़े और घंटों तक सुनसान सड़कों पर अकेले साइकिल चलाई। सीमित नींद, लगातार शारीरिक थकान और साइकिल की तकनीकी समस्याओं का समाधान भी उन्हें स्वयं ही करना पड़ा।

नितिन सैनी ने बताया कि कई बार शरीर पूरी तरह थक चुका था, लेकिन हर सुबह स्वयं को फिर से तैयार कर आगे बढ़ना ही इस यात्रा की सबसे बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कहा, “TransAm मेरे लिए सिर्फ एक साइक्लिंग रेस नहीं थी, बल्कि स्वयं को पहचानने और अपनी सीमाओं से आगे निकलने की यात्रा थी। जब शरीर जवाब देने लगता था, तब मेरा लक्ष्य, मेरा तिरंगा और मेरे शहर कोटा का विश्वास मुझे आगे बढ़ने की ताकत देता था।”

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल करना नहीं था। नितिन सैनी के अनुसार, “मैं चाहता हूँ कि जब दुनिया Ultra Cycling और Endurance Sports की बात करे, तब Kota का नाम भी सम्मान के साथ लिया जाए। आज हमारा शहर शिक्षा की राजधानी के रूप में जाना जाता है। मेरा सपना है कि आने वाले वर्षों में Kota Adventure Sports और Endurance Cycling का भी प्रमुख केंद्र बने।” उन्होंने कहा कि यदि उनकी इस यात्रा से शहर का कोई युवा बड़ा सपना देखने और उसे पूरा करने की प्रेरणा लेता है, तो यही उनकी सबसे बड़ी सफलता होगी।

पूरी यात्रा के दौरान नितिन सैनी ने भारतीय तिरंगे के साथ साइक्लिंग की और हर मंच पर स्वयं को भारत और कोटा का प्रतिनिधि माना। उन्होंने कहा, “जब मैं अमेरिका की सुनसान सड़कों पर अकेला साइकिल चला रहा था, तब मुझे हमेशा महसूस होता था कि मैं अकेला नहीं हूँ। मेरे साथ मेरा देश, मेरा तिरंगा और मेरा शहर कोटा चल रहा है।”

नितिन सैनी इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय एंड्योरेंस प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इनमें NorthCape4000 (यूरोप), Comrades Marathon (दक्षिण अफ्रीका), Paris–Brest–Paris (फ्रांस), London–Edinburgh–London (यूनाइटेड किंगडम), Kashmir to Kanyakumari साइक्लिंग अभियान तथा ISAN 2024 (थाईलैंड, लाओस एवं कंबोडिया) शामिल हैं। इन सभी अभियानों का उद्देश्य स्वयं की सीमाओं को चुनौती देना तथा भारत में एंड्योरेंस स्पोर्ट्स को बढ़ावा देना रहा है।

नितिन सैनी के पिता श्री ईश्वरलाल सैनी ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा, “एक पिता के लिए इससे बड़ा गर्व का क्षण नहीं हो सकता कि उसका बेटा अपने शहर और देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करे। बचपन से ही नितिन में चुनौतियों को स्वीकार करने का जज़्बा था। उसने हमेशा मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। TransAm जैसी कठिन प्रतियोगिता को पूरा करना केवल शारीरिक क्षमता नहीं, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति और अटूट मानसिक शक्ति का प्रमाण है। हमें गर्व है कि उसने अपनी इस उपलब्धि को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि हर जगह कोटा और भारत का नाम गर्व से लिया। मुझे विश्वास है कि उसकी यह यात्रा देश के युवाओं को बड़े सपने देखने, कठिन मेहनत करने और कभी हार न मानने की प्रेरणा देगी। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वह आगे भी इसी तरह नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करे और देश का नाम रोशन करता रहे।”

नितिन सैनी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार, मित्रों, कोच, शुभचिंतकों, Cyclotrots, Kota Randonneurs, रनिंग समुदाय, स्पॉन्सर्स तथा उन सभी लोगों को दिया जिन्होंने पूरी यात्रा के दौरान लगातार उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि कठिन समय में सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप संदेशों और शुभकामनाओं ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा।

उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य आगे भी विश्व स्तरीय अल्ट्रा एंड्योरेंस प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। साथ ही वे कोटा और राजस्थान के युवाओं को साइक्लिंग, रनिंग और एंड्योरेंस स्पोर्ट्स से जोड़ने के लिए लगातार कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में वे ऐसे और भी अंतरराष्ट्रीय अभियानों में भाग लेकर भारत के तिरंगे को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने का प्रयास करेंगे।

अपने संदेश में नितिन सैनी ने कहा, “सपने देखने वाले बहुत होते हैं, लेकिन उन्हें सच वही लोग करते हैं जो कठिनाइयों के सामने रुकते नहीं। मंज़िल एक दिन में नहीं मिलती, लेकिन हर दिन का एक छोटा कदम आपको असंभव दिखने वाले लक्ष्य तक पहुँचा देता है।”

कोटा के अंतरराष्ट्रीय अल्ट्रा एंड्योरेंस साइक्लिस्ट एवं मैराथन धावक नितिन सैनी की यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता और धैर्य का प्रमाण है, बल्कि कोटा, राजस्थान और भारत को विश्वस्तरीय एंड्योरेंस स्पोर्ट्स के मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हुई है।

Pratahkal Newsroom

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