कोटा। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना के ढांचे में किए जा रहे बदलावों और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने के विरोध में कोटा में सियासत गरमा गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर शनिवार को कोटा जिला कांग्रेस कमेटी ने गुमानपुरा स्थित कार्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता आयोजित कर 'मनरेगा बचाओ संग्राम' अभियान का बिगुल फूंका। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र की मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह एक सोची-समझी साजिश के तहत गरीब दलित मजदूरों की कमर तोड़ने और ग्राम सभाओं के संवैधानिक अधिकारों को छीनने का प्रयास कर रही है। इस अभियान के तहत कांग्रेस कार्यकर्ता 10 जनवरी से 5 फरवरी तक वार्ड स्तर और ग्राम पंचायतों तक जाकर केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध जन-जागरण करेंगे।

शहर कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष राखी गौतम ने प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कड़ा रोष प्रकट किया। उन्होंने कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाकर और नए 'जीरामजी' बिल के माध्यम से 100 दिन के काम की गारंटी को खत्म करना मजदूरों की आत्मा पर प्रहार है। राखी गौतम ने आरोप लगाया कि नई योजना के जरिए प्रधानमंत्री काम के अधिकार को अपने रिमोट कंट्रोल से चलाना चाहते हैं, जिससे अब यह योजना मजदूरों की जरूरत के बजाय सरकार की इच्छा पर निर्भर करेगी। उन्होंने ऐलान किया कि 11 जनवरी को कैथून रोड स्थित सरकारी स्कूल के पास महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष मौन उपवास रखकर सत्याग्रह किया जाएगा।

देहात अध्यक्ष भानूप्रताप सिंह ने योजना के तकनीकी पहलुओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि 'जीरामजी' योजना में 60 दिन का 'ब्लैकआउट पीरियड' प्रावधानित किया गया है, जिसका सीधा अर्थ है कि साल में दो महीने मजदूरों को अनिवार्य रूप से बेरोजगार रहना पड़ेगा। उन्होंने इसे मजदूरों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि कांग्रेस इस तानाशाही को बर्दाश्त नहीं करेगी। वहीं, कोटा प्रभारी और पीसीसी महासचिव देशराज मीणा ने कहा कि नई व्यवस्था में पंचायतें केवल डेटा एंट्री सेंटर बनकर रह जाएंगी और दिल्ली में बैठे बाबू तय करेंगे कि गांव के विकास के फैसले क्या होंगे।

प्रेसवार्ता में मौजूद पूर्व लोकसभा प्रत्याशी प्रहलाद गुंजल ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि महात्मा गांधी का नाम हटाना न केवल महापुरुषों का अपमान है, बल्कि यह कांग्रेस की जनकल्याणकारी योजनाओं को मिटाने की कुत्सित चेष्टा है। उन्होंने कहा कि 40 प्रतिशत राज्यों पर निर्भरता बढ़ाकर केंद्र ने मजदूरों के भविष्य को अधर में लटका दिया है। विधायक चेतन पटेल ने भी ग्राम पंचायतों के अधिकारों के हनन पर चिंता जताते हुए कहा कि नए बिल में काम की गारंटी पूरी तरह समाप्त कर दी गई है और अब सब कुछ अफसरों की मर्जी पर निर्भर होगा। जिला महासचिव डॉ. विजय सोनी सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस आंदोलन को गांव-गांव और वार्ड-वार्ड तक ले जाने का संकल्प लिया, ताकि गरीब तबके को उनके अधिकारों के प्रति सचेत किया जा सके।

Pratahkal Newsroom

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