समाज में संवेदनशीलता, करुणा और समावेशी प्रेम के भाव को धरातल पर उतारते हुए 'रियल टेम्पल्स ऑफ इंडिया' द्वारा कोटा के सिटी पार्क में "अनंत उत्सव" का भव्य आयोजन किया गया। यह विशेष आयोजन न केवल दिव्यांग और वंचित बच्चों के लिए खुशियों का संसार लेकर आया, बल्कि शहर के हृदय स्थल में संवेदनशीलता का एक अद्भुत संगम भी देखने को मिला। आयोजन के दौरान शहर के विभिन्न संस्थानों से आए 472 से अधिक विशेष बच्चों और बालिकाओं ने भाग लेकर उत्साह और आनंद के अविस्मरणीय क्षण जिए।

संस्थापक प्रांजल अग्रवाल ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह संपूर्ण आयोजन अनंत युवा प्रतिष्ठान से प्रेरित होकर किया गया था। इस पुनीत कार्य का मुख्य उद्देश्य समाज के इन विशेष बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें एक सुरक्षित, आत्मीय एवं आनंदमयी वातावरण उपलब्ध कराना था। उत्सव की सार्थकता तब सिद्ध हुई जब बाधित बाल विकास केंद्र, श्री करणी नगर विकास समिति, गंगा विज़न, घुमंतू छात्रावास, तेजस्विनी बालिका छात्रावास, एलबीएस दिव्यांग विद्यार्थी, शिवालिका एवं मधुस्मृति जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के बच्चों ने इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।

सिमरन बब्बर ने कार्यक्रम के विवरण साझा करते हुए बताया कि शाम 4 बजे से रात्रि 8 बजे तक चले इस उत्सव में बच्चों ने सिटी पार्क के नैसर्गिक सौंदर्य के बीच बोटिंग, मैजिक शो, फेस पेंटिंग, ब्लॉक पेंटिंग और फेसबुक पेंटिंग जैसी विभिन्न गतिविधियों में उमंग के साथ हिस्सा लिया। विशेष रूप से कई बच्चों के लिए नौकायन (बोटिंग) का यह प्रथम अनुभव था, जिसने उनके चेहरों पर एक विलक्षण चमक बिखेर दी। अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए इन बच्चों ने मंच पर कविता पाठ, नृत्य और गीतों की शानदार प्रस्तुतियां भी दीं।

मंजुल शर्मा के अनुसार, कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण कलाकारों के नेतृत्व में निकली रंगारंग परेड रही, जिसमें रंगीन परिधानों और संगीत की लहरों के बीच बच्चे स्वयं को उत्सव का केंद्र पाकर प्रफुल्लित दिखे। शाम ढलते ही आसमान में आयोजित भव्य ड्रोन शो ने बच्चों को रोमांच की पराकाष्ठा पर पहुँचा दिया। रंग-बिरंगी रोशनियों से निर्मित हाथी, घोड़े और विभिन्न कलाकृतियों के साथ-साथ शानदार आतिशबाजी ने पूरे वातावरण को प्रकाशमय कर दिया।

उत्सव के चरम पर मुख्य अतिथि पीयूष सामरिया एवं विशिष्ट अतिथि तेजस्विनी गौतम ने बच्चों के साथ मिलकर केक काटा और उनकी खुशियों में सम्मिलित हुए। अतिथियों ने बच्चों से आत्मीय संवाद स्थापित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि समाज की वास्तविक प्रगति और विकास तभी संभव है, जब हर वर्ग को समान अवसर, सम्मान और स्नेह प्राप्त हो। यह आयोजन अपनी सार्थकता और संवेदनशीलता के साथ बच्चों की स्मृतियों में एक अमिट छाप छोड़कर संपन्न हुआ।

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