कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के अंतर्गत गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ससंघ के चातुर्मासिक प्रवास के दौरान धर्मसभा आयोजित हुई। धर्मसभा में आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज के जीवन प्रसंगों का स्मरण करते हुए उनके त्याग, तप, साधना और धर्मनिष्ठा को श्रद्धापूर्वक याद किया गया।

धर्मसभा से पूर्व आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज की पूजा-अर्चना की गई। झालरापाटन सहित विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने मुनिसंघ का पाद प्रक्षालन किया। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन कर शास्त्र भेंट किए गए।

अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड ने बताया कि धर्मसभा में अशोक जैन ने विनयांजलि प्रस्तुत की। मुनि श्री विश्वास सागर जी महाराज ने वात्सल्य रत्नाकर आचार्य श्री विमल सागर जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन तप, त्याग, साधना और धर्मनिष्ठा से परिपूर्ण था।

मुनिश्री ने बताया कि ब्रह्मचर्य अवस्था में आचार्यश्री साइकिल से सम्मेद शिखरजी की यात्रा पर जा रहे थे। मार्ग में साइकिल पंचर हो गई और आसपास कोई पंचर बनाने वाला नहीं मिला। इसके बावजूद उनकी यात्रा और साधना का संकल्प प्रभावित नहीं हुआ। आचार्य महावीरकीर्ति जी से उन्हें क्षुल्लक, ऐलक एवं मुनि दीक्षा प्राप्त हुई तथा टूंडला में उन्हें आचार्य पद प्रदान किया गया। श्रद्धालुओं में उनके संबंध में वचन सिद्धि की मान्यता रही। उनकी समाधि सम्मेद शिखरजी में हुई।

मुनिश्री ने कहा कि आचार्य विमल सागर जी भक्तों को णमोकार मंत्र का स्मरण कराते हुए आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते थे। उनकी 75वीं जन्म जयंती के अवसर पर 75 ग्रंथों का प्रकाशन कराया गया। आचार्यश्री विराग सागर जी को मुनि दीक्षा प्रदान करने का सौभाग्य भी आचार्य विमल सागर जी को प्राप्त हुआ।

मुनि श्री विश्वरक्ष सागर जी महाराज ने आचार्यश्री से अपने प्रथम दर्शन का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि वर्ष 1983 में उन्होंने आचार्यश्री के दर्शन किए थे। उन्होंने बताया कि आचार्यश्री की मातुश्री कटोरा बाई का प्रतिदिन देवदर्शन करने का नियम था। एक बार देवदर्शन नहीं होने पर उन्होंने उपवास किया और मूर्ति स्थापना के बाद ही भोजन ग्रहण किया।

मुनि श्री विश्वरक्ष सागर जी महाराज ने बताया कि आचार्यश्री का जीवनकाल 79 वर्ष रहा, जिसमें करीब 38 वर्ष मुनि अवस्था में व्यतीत हुए। धर्मसभा में अनेकांत धाम श्री दिगंबर जैन तीर्थ पाटाखेड़ा, चिचोली, जिला बैतूल से आए श्री पिंटू जैन ने भी आचार्यश्री से जुड़े संस्मरण साझा किए। उन्होंने बताया कि आचार्यश्री साधकों की चिंताओं और समस्याओं को समझकर उन्हें उचित मार्गदर्शन प्रदान करते थे।

आचार्य विमल सागर जी के जीवन से जुड़े इन प्रसंगों के माध्यम से धर्मसभा में उनके तप, त्याग, साधना, आध्यात्मिक अनुशासन और साधकों के प्रति मार्गदर्शक भाव का स्मरण किया गया।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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