कोटा। शिक्षा की नगरी कोटा में शुक्रवार को ज्ञान और संकल्प का एक अनूठा संगम देखने को मिला, जब बसंत पंचमी के पावन अवसर पर कोटा विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह ने नई ऊर्जा का संचार किया। विद्या की देवी मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस पर आयोजित इस गरिमामयी समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागड़े ने स्पष्ट संदेश दिया कि शिक्षा केवल कागजी उपाधि नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति एक अटूट जिम्मेदारी है। सीआईएएम ऑडिटोरियम में जब हजारों विद्यार्थियों का भविष्य स्वर्ण पदकों की चमक से रोशन हो रहा था, तब राज्यपाल ने 'रटंत विद्या' के बजाय 'चिंतन' वाली शिक्षा को सशक्त भारत की असली आधारशिला बताया।

समारोह के मुख्य आकर्षण रहे राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े ने अपने संबोधन में भारतीय प्रतिभा की वैश्विक धमक का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज के युवा जो उपाधियां प्राप्त कर रहे हैं, वे उनके व्यक्तिगत परिश्रम का फल तो हैं ही, लेकिन उससे भी बढ़कर वे समाज के प्रति उनके ऋण का प्रतीक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी सृजनशीलता और विवेक का उपयोग देश को सशक्त बनाने में करें। राज्यपाल ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 130वीं जयंती पर उन्हें नमन करते हुए उनके त्याग और आत्मबल को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने नई शिक्षा नीति-2020 को व्यक्तित्व निर्माण का सबसे बड़ा माध्यम बताया, जिसमें केवल सूचनाएं नहीं बल्कि चरित्र और नैतिकता समाहित है।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित ऊर्जा मंत्री श्री हीरालाल नागर ने युवाओं के भीतर उद्यमिता की लौ जलाने का प्रयास किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि दीक्षांत समारोह केवल प्रमाण-पत्र लेने का नहीं, बल्कि समाज के प्रति नई जवाबदेही स्वीकार करने का क्षण है। उन्होंने युवाओं से 'नौकरी मांगने वाला' नहीं, बल्कि 'रोजगार देने वाला' बनने की अपील की और स्टार्टअप संस्कृति पर जोर दिया। श्री नागर ने प्राचीन नालंदा और तक्षशिला का उदाहरण देते हुए विश्वविद्यालयों को आधुनिक 'गुरुकुल' के रूप में विकसित करने की आवश्यकता जताई।

विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने वार्षिक प्रतिवेदन में बताया कि विश्वविद्यालय आधुनिकता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। डिजिटल पुस्तकालय और स्वचालित वितरण प्रणाली जैसी सुविधाओं के साथ 44 पाठ्यक्रमों में 2.70 लाख से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। वहीं, दीक्षांत अतिथि प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने 'मेड बाय इंडिया' और 'तकनीकी राष्ट्रवाद' का मंत्र देते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को वैश्विक अर्थव्यवस्था की कुंजी बताया।

समारोह के दौरान उपलब्धियों की झड़ी लग गई, जहां कुल 80,117 उपाधियों का वितरण किया गया। कला संकाय की छात्रा वैशाली अग्रवाल को 'कुलाधिपति पदक' और वाणिज्य संकाय के दीपांश को 'कुलपति पदक' से नवाजा गया। इसके अतिरिक्त 60 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और 81 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। आंकड़ों के लिहाज से कला संकाय में सर्वाधिक 51,023 उपाधियां दी गईं, वहीं छात्राओं की संख्या (41,644) छात्रों (38,473) से अधिक रही, जो महिला सशक्तिकरण की एक सशक्त तस्वीर पेश करती है।

इस भव्य आयोजन में विधायक कल्पना देवी, संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल, वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. बीएल वर्मा, कृषि विश्वविद्यालय की कुलगुरू प्रो. विमला डूंकवाल, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. निमित चौधरी सहित कई गणमान्य नागरिक और संकाय सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का औपचारिक समापन रजिस्ट्रार राजपाल सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह दीक्षांत समारोह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि कोटा से पूरे भारत के लिए एक संदेश था कि जब ज्ञान के साथ संस्कार और राष्ट्रभक्ति का मेल होता है, तभी एक विकसित भारत का स्वप्न साकार होता है।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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