कोटा। शिक्षा की नगरी कोटा एक बार फिर ऐतिहासिक गौरव का गवाह बनने जा रही है। कोटा विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह आगामी 23 जनवरी 2026 को नयापुरा स्थित कृषि प्रबंध संस्थान के भव्य ऑडिटोरियम में आयोजित होगा। यह केवल एक औपचारिक समारोह नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के सपनों को पंख देने वाला एक महाकुंभ है, जहां 80,117 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएच.डी. की उपाधियां प्रदान की जाएंगी। इस दीक्षांत समारोह की सबसे गौरवशाली तस्वीर महिला सशक्तिकरण की उभरती हुई शक्ति है, क्योंकि इस बार स्वर्ण पदकों से लेकर कुल उपाधियों तक में बेटियों का ही एकतरफा वर्चस्व दिखाई दे रहा है। राजस्थान के माननीय राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति इस भव्य समारोह की अध्यक्षता करेंगे और अपने हाथों से मेधावियों का सम्मान करेंगे।

विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने उत्साहपूर्वक बताया कि इस वर्ष शैक्षणिक गुणवत्ता का स्तर इतना ऊंचा रहा है कि विभिन्न संकायों में मेरिट में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले 59 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से नवाजा जाएगा। इन पदकों की फेहरिस्त में बेटियों की सफलता का डंका बज रहा है, जहाँ 42 छात्राओं ने स्वर्ण पदक जीतकर यह सिद्ध कर दिया है कि वे हर क्षेत्र में अग्रणी हैं, जबकि 17 छात्रों ने भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। कुलगुरु ने इसे समावेशी दृष्टिकोण और गुणवत्ता-आधारित शिक्षा की बड़ी सफलता करार देते हुए कहा कि बेटियों की यह भागीदारी समाज के बदलते परिदृश्य और समान अवसर की नीति का जीवंत प्रमाण है।

समारोह में उपाधियों के वितरण का विवरण विश्वविद्यालय की विशाल शैक्षणिक क्षमता को दर्शाता है। कुल 80,117 उपाधियों में से कला संकाय के खाते में सर्वाधिक 51,023 डिग्रियां आई हैं, जबकि शिक्षा संकाय से 11,444 और समाज विज्ञान से 7,324 विद्यार्थी स्नातक व स्नातकोत्तर की दहलीज पार करेंगे। विज्ञान संकाय के 6,906, वाणिज्य के 3,313 और विधि संकाय के 107 विद्यार्थियों को भी इस ऐतिहासिक दिन का साक्षी बनने का अवसर मिलेगा। विशेष बात यह है कि कुल उपाधि धारकों में 52 प्रतिशत भागीदारी यानी 41,644 संख्या छात्राओं की है, जो कोटा विश्वविद्यालय के 'बेटियों की शिक्षा' के संकल्प को मजबूती प्रदान करती है। उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय ने नए कीर्तिमान रचे हैं, जहाँ इस वर्ष 81 शोधार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की जा रही है, जिनमें 44 छात्र और 37 छात्राएं शामिल हैं।

मेधावियों की इस सूची में कला संकाय की पीजी छात्रा वैशाली अग्रवाल का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित होगा, जिन्हें उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित 'कुलाधिपति पदक' से सम्मानित किया जाएगा। वहीं, वाणिज्य संकाय के यूजी छात्र दीपांश को 'कुलपति पदक' प्रदान कर उनकी प्रतिभा का सम्मान होगा। रजिस्ट्रार राजपाल सिंह ने आयोजन की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्यपाल के आगमन से लेकर शोभायात्रा, सुरक्षा प्रोटोकॉल और उपाधि वितरण तक की सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद कर दी गई हैं। आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए इस पूरे समारोह का विश्वविद्यालय की वेबसाइट, फेसबुक और यूट्यूब पर सीधा प्रसारण किया जाएगा, ताकि दुनिया के किसी भी कोने में बैठे अभिभावक अपने बच्चों की इस स्वर्णिम उपलब्धि को लाइव देख सकें।

दीक्षांत समारोह से ठीक एक दिन पूर्व, 22 जनवरी को विश्वविद्यालय परिसर में वैचारिक विमर्श का दौर भी चलेगा। सिंधु अध्ययन शोधपीठ के तत्वावधान में और भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (NCPSL) के सौजन्य से 'राष्ट्रीय सिंधी संगोष्ठी' का आयोजन किया जाएगा। इस बौद्धिक विमर्श के उद्घाटन सत्र में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इस संगोष्ठी में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. रवि टेकचंदानी और मनीष देवनानी जैसे प्रख्यात विद्वान अपने विचार साझा करेंगे। इस पूरे भव्य आयोजन की रूपरेखा तैयार करने में वित्त अधिकारी भगवान कर्मचंदानी, प्रो. नीलू चौहान, प्रो. अनुकृति शर्मा, प्रो. घनश्याम शर्मा और सीई डॉ. प्रवीण भार्गव जैसे वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह समारोह कोटा के शैक्षणिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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Pratahkal Bureau

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