कोटा: डोल्या ग्राम सेवा सहकारी समिति की बोर्ड बैठक संपन्न, किसानों को 3.50 लाख रुपये का ऋण वितरण
कोटा के डोल्या ग्राम में ग्राम सेवा सहकारी समिति की बोर्ड बैठक में किसानों को 3.50 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया। बैठक में फसल बीमा, ऋण वसूली और सहकारी व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई, जिसमें निहाल सिंह राठौड़ और चैनसिंह राठौड़ प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

कोटा। लाडपुरा पंचायत समिति क्षेत्र के डोल्या ग्राम में सहकारिता की मजबूती और किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम उस समय देखने को मिला, जब डोल्या ग्राम सेवा सहकारी समिति लिमिटेड की संचालक मंडल एवं ऋण वितरण बैठक समिति कार्यालय एवं गोदाम, मुख्य आवास डोल्या में विधिवत आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष निहाल सिंह राठौड़ ने की, जिसमें किसानों के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर मंथन किया गया।
बैठक की शुरुआत पिछली बोर्ड बैठक में पारित प्रस्तावों की पुष्टि के साथ हुई। इसके पश्चात समिति की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से F.I.G. आईडी पोर्टल को नवनियुक्त सचिव सतीश सिंह राठौड़ के नाम मैपिंग करने तथा बैंक से लेन-देन से संबंधित अधिकार प्रदान करने जैसे अहम निर्णयों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के अंतर्गत किसानों का फसल बीमा सुनिश्चित करने, अवधिपार ऋण की वसूली, तथा समिति के विभिन्न व्यय मदों की पुष्टि जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
ऋण वितरण बैठक के दौरान समिति द्वारा किसानों को कुल 3.50 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया, जिससे कृषि कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके साथ ही अध्यक्ष निहाल सिंह राठौड़ ने किसानों को खाद के कट्टों का वितरण भी किया, जिससे रबी और आगामी फसलों की तैयारी में कृषकों को सीधी राहत मिली।
बैठक में कोटा–बूंदी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के अध्यक्ष चैनसिंह राठौड़ की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके समाधान पर जोर दिया। इस अवसर पर उन्होंने समिति परिसर में निर्माणाधीन चारदीवारी कार्य का निरीक्षण भी किया और सहकारी संस्थाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि इनका मूल उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
बैठक के दौरान उपस्थित संचालकों एवं समिति सदस्यों ने भी संस्था की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव रखे। समापन अवसर पर यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरा कि सहकारिता के माध्यम से किसान न केवल आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल सकती है।

Pratahkal Bureau
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