कोटा भीमपुरा औद्योगिक दुर्घटना: एसएसआई एसोसिएशन ने निष्पक्ष जांच की मांग की
भीमपुरा क्षेत्र में कार्यकर्ता की मौत पर एसोसिएशन ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं के पालन और ईएसआई नियमों के तहत दावों के निस्तारण पर जोर दिया है।

कोटा के भीमपुरा औद्योगिक क्षेत्र में हुई हालिया हृदयविदारक घटना ने औद्योगिक जगत को झकझोर कर रख दिया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे पर दी एसएसआई एसोसिएशन, कोटा ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत कार्यकर्ता के परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसोसिएशन ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए निष्पक्ष जांच की पुरजोर मांग की है।
घटना की सूचना मिलते ही एसोसिएशन की सक्रियता धरातल पर दिखाई दी। अध्यक्ष दीपक मेहता और सचिव समीर सूद के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने तत्काल फैक्ट्री परिसर का दौरा कर स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के उपरांत अध्यक्ष दीपक मेहता ने प्रारंभिक निष्कर्ष साझा करते हुए बताया कि फैक्ट्री में कार्य परिस्थितियां पूरी तरह सामान्य और संतोषजनक पाई गईं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह एक आकस्मिक दुर्घटना का मामला प्रतीत होता है, इसे कार्यस्थल की लापरवाही के रूप में देखना अनुचित होगा।
एसोसिएशन ने इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासनिक प्रक्रियाओं की अनदेखी पर कड़ा ऐतराज जताया है। संगठन का तर्क है कि नियमानुसार ऐसी किसी भी अप्रिय घटना के तत्काल बाद फैक्ट्री इंस्पेक्टर और श्रम विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में ही तकनीकी जांच होनी अनिवार्य है। बिना किसी ठोस विभागीय जांच के किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना न्यायसंगत नहीं है। केवल तथ्यात्मक और तकनीकी जांच ही दूध का दूध और पानी का पानी कर सकती है।
दावों और क्षतिपूर्ति के विषय पर सचिव समीर सूद ने विधिक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित कार्यकर्ता एक कॉन्ट्रैक्टर के माध्यम से कार्यरत था। ऐसे मामलों में कानून की स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है; किसी भी प्रकार की क्षतिपूर्ति या दावों का निस्तारण कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) और अन्य वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत ही सुनिश्चित किया जाना चाहिए। एसोसिएशन ने जिला प्रशासन से पुरजोर आग्रह किया है कि दावों के निपटारे में स्थापित नियमों को ही सर्वोपरि रखा जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए दी एसएसआई एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष गोविंदराम मित्तल ने एक दूरगामी चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि बिना प्रक्रियात्मक जांच के और स्थानीय दबाव में आकर उद्योगों पर की जाने वाली कोई भी कार्रवाई घातक सिद्ध हो सकती है। मित्तल के अनुसार, इस प्रकार के गैर-प्रक्रियात्मक हस्तक्षेप कोटा के औद्योगिक ईकोसिस्टम को दूषित करते हैं। यदि उद्यमियों और निवेशकों को सुरक्षा व निष्पक्षता का विश्वास नहीं मिलेगा, तो कोटा में भविष्य के निवेश पर इसका अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जो अंततः क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास की गति को बाधित करेगा।
एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय गोयल ने जिला प्रशासन से यह मांग दोहराई है कि पूरा मामला किसी भी बाहरी दबाव से मुक्त होकर केवल नियमों के आधार पर सुलझाया जाए। साथ ही, एसोसिएशन ने कोटा के समस्त उद्यमियों से भी यह अपील की है कि वे अपने कारखानों में सुरक्षा मानकों और विधिक प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी दुखद घटना की पुनरावृत्ति की संभावना को पूर्णतः समाप्त किया जा सके।

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