कोटा। वल्लभ संप्रदाय की प्रथम पीठ प्रभु श्री बड़े मथुराधीश मंदिर, पाटनपोल में रविवार को कुसुंबा छठ (कुसुम्बी षष्ठी) का पावन उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर प्रभु के जयकारों से गूंज उठा और बड़ी संख्या में वैष्णव भक्तों ने दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुसार मनाए जाने वाले इस विशेष उत्सव का संबंध महाप्रभु श्रीमद्वल्लभाचार्य जी के लाडले लाल और पुष्टिमार्ग के प्रधान स्तंभ श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी) के विरह निवारण से जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्री गुसाईं जी को प्रभु के वियोग का जो विरह था, वह इसी दिन प्रभु श्री मथुराधीश जी के दर्शन प्राप्त होने से दूर हुआ था। इसी दिव्य मिलन की स्मृति में प्रतिवर्ष कुसुंबा छठ उत्सव मनाया जाता है।

उत्सव के दौरान मंदिर के गर्भगृह और ठाकुर जी के स्वरूप को विशेष रूप से सजाया गया। प्रभु श्री बड़े मथुराधीश जी को आकर्षक कुसुम्बी रंग (गहरे लाल-नारंगी) के वस्त्र और कलात्मक आभूषण धारण कराए गए। मंदिर में चारों ओर कुसुम्बी घटा के दर्शन हुए, जिसने भक्तों को आकर्षित किया।

प्रथम पीठ के तिलकायित युवराज गोस्वामी मिलन बावा महाराजश्री के मार्गदर्शन में उत्सव की सभी सेवा प्रणालिकाएं संपन्न की गईं। पावन अवसर पर ठाकुर जी को विशेष सामग्रियों का राजभोग आरोग्याया गया। इसके बाद महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रभु की दिव्य छवि के दर्शन किए।

गोस्वामी मिलन बावा महाराजश्री ने बताया कि पुष्टिमार्ग में सेवा और भाव का सर्वोच्च स्थान है। कुसुंबा छठ का यह उत्सव जीव और ब्रह्म के अटूट संबंध तथा विरह के बाद मिलने वाले परम आनंद का संदेश देता है। प्रथम पीठ में आयोजित इस उत्सव के माध्यम से श्रद्धालुओं ने पुष्टिमार्गीय परंपरा और भक्ति भाव का अनुभव किया।

Pratahkal Newsroom

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