कोटा आलनिया ग्राम पंचायत में रोजगार की मांग को लेकर महिलाओं का प्रदर्शन
महिलाओं ने पंचायत भवन पर 5 घंटे ताला जड़ा, लोकपाल की मध्यस्थता और वन विभाग द्वारा मस्टरोल जारी करने के आश्वासन के बाद विवाद सुलझा।

कोटा की आलनिया ग्राम पंचायत में रोजगार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही महिलाओं से वार्ता करते लोकपाल जगदीश शर्मा (दाएं से दूसरे) और अन्य अधिकारी।
राजस्थान के कोटा जिले की आलनिया ग्राम पंचायत सोमवार को उस समय रणक्षेत्र में तब्दील हो गई जब रोजगार की मांग को लेकर दर्जनों श्रमिक महिलाओं ने पंचायत भवन का घेराव कर मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया। बीवीजीरामजी मस्टरोल के तहत काम न मिलने से आक्रोशित महिलाओं के इस उग्र प्रदर्शन के कारण करीब पांच घंटे तक पंचायत कार्यालय पूरी तरह ठप रहा और कर्मचारी बाहर खड़े रहने को मजबूर हो गए। अंततः लोकपाल की मध्यस्थता और वन विभाग के आश्वासन के बाद ही गतिरोध समाप्त हो सका।
घटनाक्रम के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे आलनिया और केबलनगर की लगभग 70 से 80 महिलाएं लामबंद होकर ग्राम पंचायत पहुंचीं। प्रदर्शनकारी महिलाओं का गंभीर आरोप था कि उन्हें लंबे समय से मस्टरोल के तहत रोजगार आवंटित नहीं किया जा रहा है। प्रशासनिक अनदेखी से नाराज महिलाओं ने पंचायत भवन के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया और वहीं धरने पर बैठ गईं। हंगामे की सूचना मिलते ही कनिष्ठ अभियंता (जेईएन), सहायक अभियंता (एईएन) और मंडाना तहसीलदार तुरंत मौके पर पहुंचे और महिलाओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन महिलाएं तत्काल रोजगार की मांग पर अड़ी रहीं और ताला खोलने से साफ इनकार कर दिया।
हंगामे के बीच ही ग्राम पंचायत में सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) की पूर्व निर्धारित ग्राम सभा आयोजित होनी थी। दोपहर करीब 2 बजे लोकपाल जगदीश शर्मा मौके पर पहुंचे और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महिलाओं तथा वन विभाग के अधिकारियों के बीच वार्ता की मेज सजाई। गहन विचार-विमर्श के बाद एक समझौता हुआ, जिसमें वन विभाग ने आगामी पांच दिनों के भीतर मस्टरोल जारी कर महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की लिखित सहमति जताई। इस ठोस आश्वासन के बाद ही महिलाओं ने पंचायत के ताले खोले और विरोध प्रदर्शन समाप्त किया।
हालांकि, इस घटनाक्रम ने पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक अंकेक्षण की ग्राम सभा के दौरान भारी लापरवाही उजागर हुई। लोकपाल जगदीश शर्मा ने आश्चर्य व्यक्त किया कि इतनी महत्वपूर्ण बैठक में सरपंच सहित एक भी वार्ड पंच उपस्थित नहीं था। दस्तावेजों की पड़ताल में भी भारी अनियमितताएं पाई गईं; पंचायत की कैश बुक 15 अक्टूबर 2025 के बाद से अधूरी मिली, जबकि परिसंपत्ति रजिस्टर में वर्ष 2024 के बाद कोई प्रविष्टि नहीं की गई थी। इसके अतिरिक्त, शिकायत और सामग्री रजिस्टर सहित अन्य अनिवार्य अभिलेख भी रिक्त पाए गए। लोकपाल ने नरेगा रिकॉर्ड के इस लचर संधारण पर कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

Pratahkal Bureau
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