अहिंसा दिवस के अवसर पर कोटा के कुन्हाड़ी स्थित निजी स्कूल में गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ससंघ की धर्मसभा आयोजित हुई, जहां महात्मा गांधी के जीवन और भगवान महावीर के अहिंसा एवं ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांतों पर विचार रखे गए। धर्मसभा में आचार्य शिरोमणि गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज की भक्तिभाव से पूजा-अर्चना भी की गई।

विद्यालय निदेशक अखिलेश जैन ने विनयांजलि प्रस्तुत करते हुए गांधीजी के जीवन और उनके अहिंसा के प्रति समर्पण को याद किया। प्रवर्तक मुनिश्री विश्वनायक सागर जी महाराज ने कहा कि गांधी जयंती को देशभर में अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने जैन दर्शन में काल की अवधारणा बताते हुए कहा कि अवसर्पिणी और उत्सर्पिणी काल की मान्यता जैन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अवसर्पिणी काल के प्रारंभ में कुलकरों की परंपरा रही और अंतिम कुलकर नाभिराय हुए, जिनके पुत्र प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव हुए।

मुनिश्री विश्वनायक सागर जी महाराज ने कहा कि भारत की पहचान विश्व में अहिंसा के संदेश के लिए रही है। दिगंबर जैन मुनियों का जीवन त्याग, संयम और अहिंसा का उदाहरण है। वे पदविहार करते हैं, केशलोच करते हैं तथा जीवों की रक्षा के लिए सावधानीपूर्वक जीवन जीते हैं। अहिंसा केवल किसी को चोट नहीं पहुंचाने का नाम नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव के प्रति मैत्री और करुणा का भाव रखने की जीवन पद्धति है।

उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर क्रोध मनुष्य के जीवन में अशांति पैदा करता है। भगवान महावीर का अहिंसा और मैत्री का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी जैन चिंतक श्रीमद् राजचंद्रजी से प्रभावित थे और गांधीजी ने अहिंसात्मक आंदोलन के माध्यम से स्वतंत्रता संघर्ष को नई दिशा दी।

गणधर मुनिश्री विवर्धन सागर जी महाराज ने कहा कि उनका जन्म भगवान महावीर की पावन जन्मभूमि पर हुआ है। भगवान महावीर के ‘जियो और जीने दो’ तथा ‘अहिंसा परमो धर्मः’ के सिद्धांतों को गांधीजी ने अपने जीवन में अपनाया। उन्होंने कहा कि विद्यालय बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार देने का भी महत्वपूर्ण केंद्र हैं। वर्तमान समय में परिवार और समाज से बढ़ती दूरी चिंता का विषय है। माता-पिता, परिवार और समाज से जुड़ाव कमजोर होने पर संस्कारों और धार्मिक मूल्यों से भी दूरी बढ़ सकती है।

मुनिश्री ने मोबाइल के अत्यधिक उपयोग को लेकर भी बच्चों को सचेत किया। उन्होंने कहा कि मोबाइल पर अनावश्यक समय बिताने से आवश्यक कार्यों और जिम्मेदारियों की उपेक्षा होने लगती है। बच्चों को समय का सदुपयोग करते हुए शिक्षा, संस्कार और परिवार के साथ जुड़ाव को प्राथमिकता देनी चाहिए।

अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि धर्मसभा में सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष प्रकाश बज, महामंत्री पदम बडला, जम्बू सेठिया दादाबाड़ी, टीकम पाटनी, महावीर बडला, संजय सांवला, अभिनव पहाड़िया, आलोक खटोड़ स्टेशन, पारस कासलीवाल, पारस लुहाड़िया, अशोक पापड़ीवाल सहित समाज के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।

गणाचार्य विराग सागर जी महाराज एवं पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के सुशिष्य गणधर मुनिश्री 108 विवर्धन सागर जी महाराज एवं प्रवर्तक मुनिश्री विश्वनायक सागर जी महाराज ससंघ का 3 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर से श्री पंचबालायती दिगंबर जैन मंदिर, जवाहरनगर के लिए मंगलविहार होगा। रात्रि विश्राम जवाहरनगर में रहेगा।

4 अक्टूबर को प्रातः 6 बजे मुनिसंघ जवाहरनगर से मंगलविहार कर आर.के.पुरम स्थित त्रिकाल चौबीसी में मंगल प्रवेश करेगा, जहां आहारचर्या भी संपन्न होगी। गांधी जयंती पर आयोजित धर्मसभा में अहिंसा, मैत्री, संयम, संस्कार और जीवन में जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता का संदेश प्रमुखता से सामने आया।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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