कोटा। शिक्षा की नगरी कोटा में छात्र राजनीति का पारा एक बार फिर चढ़ गया है। राजकीय कला महाविद्यालय के मुख्य मार्ग से नवीन भवन तक जाने वाली जर्जर सड़क अब केवल एक प्रशासनिक फाइल नहीं, बल्कि छात्रों के स्वाभिमान की लड़ाई बन चुकी है। पिछले तीन वर्षों से धूल और गड्ढों के बीच भविष्य तलाश रहे छात्रों का धैर्य गुरुवार को उस समय जवाब दे गया, जब उन्होंने एनएसयूआई के बैनर तले कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) और जिला प्रशासन की 'सद्बुद्धि' के लिए महाविद्यालय परिसर में ही यज्ञ का आयोजन किया। मंत्रोच्चार और आहुतियों के बीच छात्रों ने सिस्टम को जगाने का प्रयास किया, जिसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने 10 दिनों के भीतर निर्माण कार्य शुरू करने का लिखित आश्वासन दिया है।

इस पूरे प्रकरण की जड़ें तीन साल पुरानी हैं। छात्र नेता रिद्धम शर्मा ने आंदोलन की पृष्ठभूमि साझा करते हुए बताया कि महाविद्यालय के छात्र लंबे समय से एक पक्की सड़क की सुविधा से वंचित हैं। पहले बजट का रोना रोया गया, लेकिन छात्रों के कड़े संघर्ष और कोटा उत्तर विधायक शांति धारीवाल के हस्तक्षेप के बाद 10 लाख रुपये का बजट स्वीकृत कराया गया था। विडंबना यह रही कि बजट और टेंडर की प्रक्रिया पूरी हुए छह महीने का समय बीत चुका है, लेकिन केडीए की सुस्ती के कारण जमीन पर एक पत्थर तक नहीं लगा। इसी प्रशासनिक उदासीनता ने छात्रों को धार्मिक अनुष्ठान के जरिए विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर किया।

यज्ञ के दौरान छात्रों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि अगले 10 दिनों में धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ, तो यह आंदोलन केवल नारों तक सीमित नहीं रहेगा। छात्रों ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि वे इसके बाद भूख हड़ताल और दंडवत यात्रा जैसे उग्र कदम उठाएंगे। छात्रों के इस तेवर और बढ़ते आक्रोश को भांपते हुए केडीए प्रशासन तत्काल सक्रिय हुआ। विभाग ने आनन-फानन में ठेकेदार को कार्य प्रारंभ करने के निर्देश देते हुए एक आधिकारिक पत्र जारी किया। महाविद्यालय के प्राचार्य रोशन भारती ने स्वयं मौके पर पहुंचकर छात्रों को वह पत्र सौंपा और विश्वास दिलाया कि अब सड़क निर्माण में और विलंब नहीं होगा।

इस प्रदर्शन में छात्र शक्ति की एकजुटता साफ नजर आई। वरिष्ठ छात्र नेता मोहित कुमार और एनएसयूआई पाटन नगर अध्यक्ष पीयूष शर्मा के साथ रोहित मेघवाल, यशराज, हंसवी, नेहा मंसूरी और सुमित सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि जब शैक्षणिक संस्थानों की बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी की जाती है, तो छात्र शक्ति किस तरह लोकतांत्रिक और प्रतीकात्मक आंदोलनों के जरिए सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर सकती है। अब सभी की निगाहें केडीए के उस 10 दिन के वादे पर टिकी हैं, जो छात्रों के भविष्य की राह को सुगम बनाने वाला है।

Pratahkal Bureau

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