कोटा: श्रीमद् देवी भागवत के माध्यम से नारी शक्ति का शंखनाद, नमिता पारीक को मिली पीएचडी की उपाधि
कोटा विश्वविद्यालय ने नमिता पारीक को ‘श्रीमद् देवी भागवत पुराण में नारी चेतना’ विषय पर शोध के लिए पीएचडी की उपाधि प्रदान की है। प्रोफेसर प्रतिभा किरण के निर्देशन में संपन्न यह शोध आधुनिक युग में नारी सशक्तिकरण, आर्थिक स्वतंत्रता और नेतृत्व क्षमता को पौराणिक संदर्भों के साथ जोड़कर एक नई दृष्टि प्रदान करता है, जो समाज में महिलाओं की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करता है।

कोटा। शिक्षा की नगरी कोटा में एक बार फिर शैक्षणिक उत्कृष्टता और पौराणिक शोध का अनूठा संगम देखने को मिला है। कोटा विश्वविद्यालय ने नमिता पारीक के शोध की गंभीरता और उसकी सामाजिक प्रासंगिकता को स्वीकार करते हुए उन्हें पीएचडी (विद्या वाचस्पति) की मानद उपाधि से विभूषित किया है। उनका यह शोध कार्य मात्र एक अकादमिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह प्राचीन धर्मग्रंथों के आलोक में आधुनिक नारी की अदम्य चेतना और उसके निर्णायक स्वरूप को व्याख्यायित करने वाला एक सशक्त वैचारिक पुल है।
नमिता पारीक ने अपना यह विशिष्ट शोध कार्य “श्रीमद् देवी भागवत पुराण में नारी चेतना” विषय पर पूर्ण किया है। उनका यह अध्ययन वर्तमान युग की नारी के दिव्य स्वरूप को रेखांकित करते हुए यह सिद्ध करता है कि आर्थिक आत्मनिर्भरता, राष्ट्र की रक्षा और ज्ञान के उच्चतम शिखरों पर नारी की भूमिका सदैव से सशक्त और नेतृत्वकारी रही है। पौराणिक आख्यानों को समकालीन परिप्रेक्ष्य से जोड़कर नमिता ने यह प्रतिपादित किया है कि नारी केवल समाज का हिस्सा नहीं, बल्कि उसकी नियामक शक्ति है।
यह महत्वपूर्ण शोध यात्रा राजकीय महाविद्यालय बूंदी की प्रोफेसर प्रतिभा किरण के कुशल निर्देशन में संपन्न हुई। प्रोफेसर प्रतिभा किरण के मार्गदर्शन में नमिता ने देवी भागवत पुराण के शास्त्रीय संदर्भों की ऐसी नवीन व्याख्या प्रस्तुत की है, जो नारी सशक्तिकरण की पारंपरिक अवधारणा को एक नई और व्यापक दृष्टि प्रदान करती है। यह शोध कार्य यह स्पष्ट करता है कि प्राचीन ग्रंथों में वर्णित नारी चेतना आज के समय में कितनी अधिक प्रासंगिक और प्रेरणादायी है।
इस शोध के निष्कर्ष न केवल अकादमिक जगत के लिए अमूल्य हैं, बल्कि विभिन्न कार्यक्षेत्रों में संघर्षरत और कार्यरत महिलाओं के लिए एक संबल के रूप में उभरे हैं। यह कार्य महिलाओं को दक्षता, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता के साथ समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। गौरतलब है कि अपनी इस उपलब्धि से शिक्षा जगत को गौरवान्वित करने वाली नमिता पारीक वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू टीचर ट्रेनिंग कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। उनका यह शोध भविष्य में नारी चेतना और पौराणिक शोध के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा।

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