खेतीका के ‘साथी’ प्रोग्राम से बदलेगी खेती की तस्वीर, स्वच्छ आहार और टिकाऊ खेती की दिशा में बड़ा कदम
खेतीका ने कोटा के खेड़ारुधडा गांव में अपने ‘साथी’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य किसानों को तकनीक, पारदर्शिता और प्रशिक्षण से सशक्त बनाना है। केंद्र में गुणवत्ता परीक्षण, डिजिटल ट्रैकिंग और तेजी से भुगतान की सुविधाएँ उपलब्ध होंगी, जिससे ऑर्गेनिक खेती और शुद्ध खाद्य आपूर्ति को बढ़ावा मिलेगा।

कोटा, दिसंबर 2025: हाड़ौती की उपजाऊ धरती पर आज वह पहल शुरू हुई, जिसे किसान अपनी नई उम्मीद के रूप में देख रहे हैं। कृषि नवाचार को आगे बढ़ाने वाली संस्था खेतीका ने ‘साथी’ नामक अपने महत्त्वाकांक्षी कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जिसके जरिये किसानों की आमदनी बढ़ाने, उन्हें तकनीक से सशक्त बनाने और उपभोक्ताओं तक शुद्ध, पारदर्शी और ऑर्गेनिक भोजन पहुँचाने का लक्ष्य तय किया गया है। कार्यक्रम का पहला साथी केंद्र रामगंजमंडी की खेड़ारुधडा ग्राम पंचायत में खोला गया, जहाँ कृषि, बागवानी और स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति ने इसे एक ऐतिहासिक शुरुआत बना दिया।
शुभारंभ कार्यक्रम में कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक आतिश कुमार शर्मा, बागवानी विभाग के उप निदेशक नंदबिहारी मालव, राजस्थान सरकार के उप जिला प्रमुख कृष्ण गोपाल आहिर, कृषि विभाग के रामसागर मीणा, कृषि पर्यवेक्षक राधेश्याम मीणा, भारतीय किसान यूनियन के सदस्य भेरूलाल आहिर और अंबुजा सीमेंट फाउंडेशन से चंद्रप्रकाश मौजूद रहे। सभी ने संयुक्त रूप से इस केंद्र को ग्रामीण किसानों के लिए अत्याधुनिक और पारदर्शी खेती मॉडल की दिशा में एक मजबूत कदम बताया।
खेतीका के सीईओ एवं को-फाउंडर डॉ. पृथ्वी सिंह ने बताया कि साथी भारतीय खेती की पुरानी चुनौतियों का समाधान है। किसानों को केवल मदद नहीं, बल्कि एक ऐसा सिस्टम चाहिए जो ईमानदार, सरल और तकनीक से संचालित हो। उन्होंने कहा कि जब किसान प्रशिक्षित होते हैं, संसाधनों से जुड़ते हैं और डिजिटल सिस्टम अपनाते हैं, तो खेती से बाजार तक की पूरी प्रक्रिया मजबूत और टिकाऊ बन जाती है। साथी का लक्ष्य है कि शुद्ध और विश्वासयोग्य भोजन सीधे उन किसानों से उपभोक्ताओं तक पहुँचे जो सम्मानित, सशक्त और आधुनिक उपकरणों से जुड़े हों। यह मॉडल किसानों, उपभोक्ताओं और कृषि बाजार—सभी को पारदर्शिता और भरोसे का एक साझा मंच देता है।
भारत में खेती से जुड़ी कई समस्याएँ किसानों की आय को प्रभावित करती हैं। अधिकांश किसान सीधे बाजार से नहीं जुड़ पाते, गुणवत्ता आधारित प्रशिक्षण की कमी, भुगतान में देरी, मध्यस्थों पर निर्भरता और खेती में तकनीक के सीमित उपयोग से उनका लाभ कम हो जाता है। हालिया सर्वे के अनुसार केवल 2 प्रतिशत किसान प्रिसिजन एग्रीकल्चर उपकरणों का उपयोग करते हैं, जबकि डिजिटल फार्मिंग टूल्स अपनाने वालों की संख्या मात्र 4 प्रतिशत है। यह स्थिति बताती है कि किसानों के पास अभी भी आधुनिक खेती के लिए आवश्यक तकनीकी ढाँचा उपलब्ध नहीं है।
खेतीका का साथी कार्यक्रम इन्हीं समस्याओं को जड़ से हल करने का प्रयास करता है। इस केंद्र में किसानों को प्रशिक्षण से लेकर फसल की पारदर्शी खरीद तक सभी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। केंद्र में फसल की गुणवत्ता जांचने वाली लैब, डिजिटल वज़न प्रणाली, नमी और ग्रेडिंग जांच, क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग सिस्टम, साफ-सुथरी ग्रेडिंग यूनिट, सुरक्षित स्टोरेज और 24 घंटे में भुगतान की गारंटी जैसी सुविधाएँ सुनिश्चित की गई हैं। इस पूरे सिस्टम को सुपरखेत और सुपरजीआरटी ऐप से जोड़ा गया है, जिसके माध्यम से बीज से लेकर कटाई तक हर चरण का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहता है।
कार्यक्रम के पहले चरण में राजस्थान, गुजरात, बिहार, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, केरल और तमिलनाडु जैसे प्रमुख कृषि राज्यों में ऐसे केंद्र स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक केंद्र में 2,000 से अधिक किसानों को जोड़ा जाएगा, जबकि 40 प्रतिशत से अधिक फसलें सीधे स्थानीय स्तर से खरीदी जाएंगी। मिर्च, हल्दी, धनिया, जीरा, सोयाबीन, सरसों, दालें, बाजरा, तिल, इलायची, काली मिर्च और लौंग जैसे प्रमुख कृषि उत्पादन इस कार्यक्रम के प्राथमिक फोकस में होंगे।
साथी के अंतर्गत किसान को निरंतर प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें कीट प्रबंधन, ऑर्गेनिक खेती, मिट्टी-पानी संरक्षण, कृषि तकनीक का उपयोग, फसल कटाई के बाद प्रबंधन और वित्तीय समझ विकसित करने जैसे विषय शामिल होंगे। खेतिका के विशेषज्ञ यह प्रशिक्षण केवीके, कृषि विश्वविद्यालयों और विभिन्न संगठनों के सहयोग से देंगे ताकि किसान मौसम परिवर्तन और कृषि चुनौतियों का वैज्ञानिक ढंग से सामना कर सकें।
इस कार्यक्रम के माध्यम से खेती को केवल लाभकारी नहीं, बल्कि टिकाऊ और भविष्य के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया गया है। खेतीका का साथी, किसानों को तकनीक, प्रशिक्षण और पारदर्शिता के साथ जोड़कर उनकी खेती को नई दिशा देने का वादा करता है, जो आने वाले वर्षों में भारतीय कृषि पर गहरा प्रभाव छोड़ सकता है।

Pratahkal Bureau
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