आध्यात्मिक चेतना और धर्ममय ऊर्जा से ओतप्रोत कोटा के महावीर नगर विस्तार योजना स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर परिसर में इन दिनों विशेष धार्मिक वातावरण बना हुआ है। परम पूज्य आचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज एवं आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज की परम प्रभावक शिष्या, परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री 105 विभाश्री माताजी एवं आर्यिका श्री 105 विनयश्री माताजी (ससंघ, 12 पिच्छी) के मंगलमय शीतकालीन वाचना प्रवास के अंतर्गत धर्मसभा एवं धार्मिक आयोजनों का क्रम निरंतर जारी है।

शनिवार को आयोजित धर्मसभा में दीप प्रज्वलन, शास्त्र भेंट एवं पाद पक्षालन जैसे पुण्य अनुष्ठानों का आयोजन हुआ, जिसमें पुण्यार्जक परिवार ने विधिपूर्वक पुण्यलाभ अर्जित किया। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं की श्रद्धा और भक्ति से मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष पवन टोला एवं महामंत्री पारस जैन ने जानकारी दी कि संत नामदेव भवन में 23 दिसंबर से 30 दिसंबर 2025 तक कल्पतरु मंडल विधान का भव्य आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आयोजन की सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और समिति के साथ समाजजन इसे सफल बनाने के लिए उत्साहपूर्वक जुटे हुए हैं।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य गणिनी आर्यिका श्री 105 विभाश्री माताजी ने जीवन के मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सहजता, सरलता और पर-निंदा से दूरी ही सच्चे धर्म की पहचान है। उन्होंने बताया कि निंदा से आत्मा पर कर्मों का बंधन बढ़ता है, जबकि संयम, क्षमा और सद्भाव से आत्मिक शुद्धि और उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

माताजी ने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे हमारे आचरण, विचार और वाणी में उतरना चाहिए। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं से संयमित, सदाचारी और करुणामय जीवन अपनाने का आह्वान किया।

कल्पतरु मंडल विधान का यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान का केंद्र बनेगा, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, आत्मशुद्धि और धर्म के प्रति जागरूकता को भी नई दिशा देगा।

Pratahkal Bureau

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